भारत ने एशियाई खेल 2038 की मेजबानी के लिए शुरू किए प्रयास, एशियाई ओलंपिक परिषद को लिखा पत्र

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नईदिल्ली, । भारत ने 2036 के ओलंपिक खेलों के आयोजन के लिए अपनी दावेदारी पेश करने और राष्ट्रमंडल खेल 2030 के मेजबानी अधिकार हासिल करने के बाद एशियाई खेल 2038 पर अपनी निगाहें जमा ली हैं। भारतीय ओलंपिक संघ ने एशियाई ओलंपिक परिषद को पत्र लिखकर एशियाई खेल 2038 की मेजबानी में रुचि व्यक्त की है। बता दें कि 2026 संस्करण जापान के आइची-नागोया, 2030 संस्करण दोहा और 2034 संस्करण रियाद में आयोजित किया जाएगा।
चीन के सान्या में महाद्वीपीय निकाय की कार्यकारी बोर्ड की बैठक में भारत के प्रस्ताव पर चर्चा की गई और निर्णय लिया गया कि एशियाई ओलंपिक परिषद की मूल्यांकन टीम बोली का आंकलन करने के बाद देश का दौरा करेगी। भारतीय ओलंपिक संघ के सीईओ रघुराम अय्यर ने कहा, हम एशियाई खेलों की मेजबानी के इच्छुक हैं। हम एशियाई ओलंपिक परिषद के संपर्क में हैं और हमने कतर के एशियाई ओलंपिक परिषद अध्यक्ष शेख जोआन बिन हमद अल थानी पत्र लिखकर अपनी रुचि व्यक्त की है।
भारत के अलावा, दक्षिण कोरिया और मंगोलिया अन्य ऐसे देश हैं जिन्होंने 2038 एशियाई खेलों की मेजबानी में रुचि दिखाई है। भारत ने 1951 में पहली बार एशियाई खेलों की मेजबानी की थी। यह इवेंट आखिरी बार 1982 में देश में आयोजित हुआ था। दोनों ही मौकों पर खेल नई दिल्ली में हुए थे। 2038 के लिए बोली 2036 के ओलंपिक के प्रस्ताव की तरह अहमदाबाद पर केंद्रित है। अहमदाबाद में ही 2030 के राष्ट्रमंडल खेल भी आयोजित किए जाएंगे।
एशियाई खेल एथलीटों की संख्या के लिहाज से ओलंपिक खेलों से कहीं अधिक बड़े माने जाते हैं। इनमें अक्सर लगभग 12,000 एथलीट भाग लेते हैं, जबकि ओलंपिक खेलों में लगभग 10,500 ही भाग लेते हैं। इसके अलावा, एशियाई खेलों का खेल कार्यक्रम भी कहीं अधिक व्यापक है। चीन के हांगझोऊ में आयोजित पिछले एशियाई खेलों में 40 खेल शामिल थे, जबकि 2024 के पेरिस ओलंपिक में 32 खेल शामिल थे। ऐसे में भारत को इसकी मेजबानी मिलना काफी अहम होगा।
एक अधिकारी ने कहा कि 2038 में एशियाई खेलों की मेजबानी करना एक तार्किक कदम होगा। उन्होंने कहा, अगले 3 से 4 सालों में अहमदाबाद में कई खेल स्थल तैयार हो जाएंगे। इन स्थलों का निर्माण खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है। अगर, भारत को मेजबानी मिलती है, तो एशियाई खेल एक आदर्श विरासत आयोजन साबित होंगे क्योंकि इनमें से अधिकांश स्थलों का पुन: उपयोग किया जा सकता है।

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