जयन्त प्रतिनिधि।
श्रीनगर गढ़वाल : भौगोलिक सोसायटी ऑफ उत्तराखंड के तत्वावधान में मीठे जल संसाधन एवं स्प्रिंगशेड प्रबंधन विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन बुधवार को भूगोल विभाग, स्कूल ऑफ अर्थ साइंसेज, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय (केंद्रीय विश्वविद्यालय), श्रीनगर गढ़वाल के आतिथ्य में किया जाएगा। संगोष्ठी के संयोजक प्रो. एम. एस. पंवार, भूगोल विभाग हैं।

हिमालय क्षेत्र में जलस्रोतों, विशेषकर प्राकृतिक झरनों का स्थानीय समुदायों के जीवन, आजीविका, कृषि, जैव विविधता तथा पारिस्थितिक संतुलन में महत्वपूर्ण योगदान है। जलवायु परिवर्तन, अनियोजित विकास, भूमि उपयोग में परिवर्तन, वनों पर बढ़ते दबाव तथा जलस्रोतों के क्षरण के कारण हिमालयी क्षेत्रों में जल उपलब्धता एवं झरनों के पुनर्जीवन की चुनौती लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। इस संदर्भ में स्प्रिंगशेड प्रबंधन जलस्रोतों के संरक्षण, पुनर्भरण एवं दीर्घकालिक जल सुरक्षा के लिए एक समग्र एवं समुदाय-आधारित दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। संगोष्ठी का उद्देश्य हिमालयी क्षेत्रों में मीठे जल संसाधनों की स्थिति, झरनों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन, जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन, भूजल पुनर्भरण, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव तथा समुदाय-आधारित स्प्रिंगशेड प्रबंधन से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों, नीति-निर्माताओं तथा स्थानीय हितधारकों के बीच विचार-विमर्श को बढ़ावा देना है।