कोलकाता । कोलकाता सहित दक्षिण बंगाल में काल बैसाखी का तांडव के कारण आज जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा और इस दौरान बाबूघाट प्रिंसेप घाट इलाके में आम चुनने के चक्कर में एक युवक की मौत सर्कुलर रेलवे के ऊपर से गुजर रहे एक तार के टूटने के कारण आग लगने से हो गई। महानगर कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों में आज दोपहर अचानक आए भीषण ‘काल बैसाखीÓ तूफान और मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। करीब 70 से 88 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली चक्रवाती हवाओं के कारण महानगक के तमाम हिस्सों में पेड़ उखड़ गए, यातायात ठप हो गया और विमान व ट्रेन सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं। तूफान के दौरान उपरोक्त युवक की मौत का सबसे दर्दनाक हादसा ऐतिहासिक प्रिंसेप घाट पर हुआ। तेज हवाओं और मौसम की खराबी के बीच वहां अचानक आग लग गई, जिसके बाद एक जोरदार विस्फोट हुआ। इस धमाके की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई। प्रशासन इस घटना के सटीक कारणों की जांच कर रहा है।
अलीपुर मौसम विभाग के क्षेत्रीय निदेशक हबीबुर रहमान बिस्वास ने बताया कि एक जबरदस्त काल बैसाखी का तूफ़ान जिसे ‘नॉर्वेस्टरÓ भी कहते हैं दोपहर लगभग 2:30 बजे दमदम इलाके से टकराया, और उसके बाद लगभग 2:45 बजे कोलकाता पर इसका असर पड़ा। दमदम में तूफान के दौरान हवा की अधिकतम गति 74 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई, जबकि कोलकाता के दमदम में यह बढ़कर 88 किलोमीटर प्रति घंटा हो गई। बता दे कि, कोलकाता और उसके नजदीकी जिलों में सुबह से ही आसमान में काले बादल छाए हुए थे। दोपहर होते-होते मौसम का मिजाज तेजी से बिगड़ा। दोपहर ठीक 2 बजे के बाद पूरे शहर में अचानक अंधेरा छा गया और कड़कती बिजली के साथ मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। तूफान अपनी चरम तीव्रता पर था और सॉल्टलेक समेत कई इलाकों में हवा की रफ्तार लगभग 88 किमी प्रति घंटा दर्ज की गई। तेज हवाओं के थपेड़ों को शहर के तमाम पुराने और बड़े पेड़ बर्दाश्त नहीं कर सके। सॉल्टलेक, गोल्फग्रीन और मध्य कोलकाता के कई प्रमुख रास्तों पर विशालकाय पेड़ और उनकी शाखाएं सड़क पर आ गिरीं। इसके चलते खबर के लिखे जाने तक गाड़ियों की आवाजाही पूरी तरह रुक गई और लंबा ट्रैफिक जाम लग गया था। कई गाड़ियां भी पेड़ों के नीचे दबकर क्षतिग्रस्त हो गईं।
सियालदह डिवीजन के अंतर्गत आने वाली बारासात शाखा भी इस तूफान की मार से अछूती नहीं रही। मध्यमग्राम स्टेशन के पास रेलवे का ओवरहेड (बिजली का) तार टूटकर गिर गया। इसके चलते सियालदह-बारासात रूट पर ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह ठप हो गया। दफ्तरों और काम से घर लौट रहे हजारों यात्री विभिन्न स्टेशनों पर फंस गए, जिन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
तूफान की तीव्रता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसने कोलकाता मेट्रो के बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचाया। ‘शहीद खुदीरामÓ मेट्रो स्टेशन की छत (शेड) का एक बड़ा हिस्सा तेज हवा के कारण उड़ गया। सुरक्षा के लिहाज से और मलबे को हटाने के लिए मेट्रो संचालन को भी कुछ समय के लिए धीमा या प्रभावित करना पड़ा। भारी बारिश के कारण नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (कोलकाता एयरपोर्ट) का रनवे पूरी तरह पानी में डूब गया। रनवे पर जलभराव और खराब दृश्यता के कारण एटीसी ने कुछ समय के लिए विमानों की लैंडिंग और टेक-ऑफ को रोक दिया। उड़ानों में हुई इस देरी के कारण एयरपोर्ट पर यात्रियों की भारी भीड़ जमा हो गई और उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस भीषण गर्मी के बीच आई बारिश ने जहां कोलकाता वासियों को तापमान में गिरावट के साथ सुहाने मौसम की राहत दी, वहीं जलभराव, कटी हुई बिजली और ट्रैफिक जाम ने लोगों की मुश्किलों को दोगुना कर दिया। फिलहाल, कोलकाता नगर निगम, पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें सड़कों से गिरे हुए पेड़ों को हटाने, जलभराव वाले इलाकों से पानी निकालने और रेलवे के ओवरहेड तारों की मरम्मत के काम में युद्ध स्तर पर जुटी हुई हैं। गौरतलब है कि, तूफान का कहर सिफ़र् कोलकाता तक ही सीमित नहीं था। बरन आज दक्षिण बंगाल के ज्यादातर जिलों में तेज तूफ़ान के साथ भारी बारिश भी हुई। मौसम विभाग ने पूर्वानुमान लगाया है कि कल यानी शनिवार को दक्षिण बंगाल के कई जिलों में तूफान और बारिश की संभावना बनी रहेगी। मौसम की ऐसी स्थिति होने की संभावना विशेष रूप से पूर्वी और पश्चिमी मेदिनीपुर, झाड़ग्राम, पुरुलिया, बांकुड़ा, पूर्वी और पश्चिमी बर्द्धमान, बीरभूम और मुर्शिदाबाद जिलों में ज्यादा है।