जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : समाज सुधारक कर्मवीर जयानंद भारतीय को भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग उठने लगी है। शैलशिल्पी विकास संगठन ने उनकी 146वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए केंद्र सरकार से उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग की।

शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में संगठन के अध्यक्ष विकास कुमार आर्य ने कहा कि कर्मवीर जयानंद भारतीय ने अपना संपूर्ण जीवन समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित किया। उन्होंने महिला शिक्षा को बढ़ावा देने, जातिगत भेदभाव मिटाने और शिल्पकार समाज को उनके अधिकार दिलाने के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाने के दौरान उन्हें छ: बार जेल भी जाना पड़ा। विकास कुमार आर्य ने कहा कि जयानंद भारतीय ने सामाजिक समानता, धार्मिक सहिष्णुता और आर्थिक न्याय की स्थापना के लिए आजीवन संघर्ष किया। उनके नेतृत्व में लगभग 20 वर्षों तक चले डोला-पालकी आंदोलन ने सामाजिक भेदभाव के खिलाफ आवाज बुलंद की और समान अधिकारों की लड़ाई को नई दिशा दी। सेवानिवृत्त रेंजर केशीराम निराला ने कहा कि जयानंद भारतीय ने शिक्षा के माध्यम से वंचित समाज को जागरूक करने के साथ ही उनके मानवीय अधिकारों की रक्षा के लिए भी उल्लेखनीय कार्य किए। डोला-पालकी आंदोलन के जरिए उन्होंने सामाजिक शोषण का विरोध किया और लोगों को अपने अधिकारों के प्रति सजग बनाया। कार्यक्रम में शिव कुमार, धीरज धर बछवाण, अनिल कुमार, विनीता भारती, जगमोहन सिंह, राजीव कुमार और राकेश कुमार सहित कई लोग उपस्थित रहे। सभी ने कर्मवीर जयानंद भारतीय के सामाजिक योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।