केदारनाथ तीर्थपुरोहितों ने पीएम को पत्र भेज की कार्रवाई की मांग

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रुद्रप्रयाग। केदारनाथ तीर्थपुरोहितों ने देश के प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर अपनी समस्या पर कार्रवाई करने की मांग की है। तीर्थपुरोहितों का कहना है कि शासन-प्रशासन जबरन उनके पैतृक भवन और व्यवसायिक भवन छीनना चाहती है। डीएम के माध्यम से प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में तीर्थपुरोहितों को कहना है कि केदारनाथ में शासन, प्रशासन स्थानीय लोगों व हक-हकूकधारियों के पुश्तैनी आवासीय व व्यवसायिक भवनों का अधिग्रहण कर उन्हें ध्वस्त कर वहां मंदिर समिति के भवनों का निर्माण करना चाहती है। जबकि केदारनाथ मंदिर की स्वयं की अपनी कई नाली भूमि है, जो पूरी तरह से सुरक्षित है। बावजूद निजी भूमि व भवनों का अधिग्रहण किया जा रहा है, जो उचित नहीं हैं। उन्होंने केदारनाथ में मास्टर प्लान के तहत निर्माण को धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ बताते हुए कहा कि प्लाजा का निर्माण सांस्कृतिक व धार्मिक परंपरा से हटकर है। पत्र में तीर्थपुरोहितों ने देवस्थानम बोर्ड के गठन पर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि केदारनाथ समेत 51 मंदिरों का अधिग्रहण कर बोर्ड गठित किया गया है, जिसमें उन्हें विश्वास में नहीं लिया गया है। उन्होंने केदारनाथ को स्मार्ट सिटी की तर्ज पर विकसित करने को आदिगुरू शंकराचार्य द्वारा स्थापित मान्यताओं का उल्लंघन बताया। कहा कि तीर्थपुरोहित व हक-हकूकधारी किसी भी हालत में केदारनाथ में निर्माण कार्यों के लिए अपनी भूमि व भवन नहीं देंगे। उन्होंने दलदली भूमि पर भारी-भरकम निर्माण को अनुचित बताते हुए कहा कि यह धन के दुरूपयोग के साथ स्थानीय पर्यावरण के लिए भी खतरा है। पत्र में केदार सभा के महामंत्री कुबेरनाथ पोस्ती, विपिन सेमवाल, पूर्व जिपं सदस्य केशव तिवारी, जेपी तिवारी, गणेश तिवारी, प्रवीण तिवारी, सुबोध शुक्ला, टीपी तिवारी आदि के हस्ताक्षर है।

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