कोलकाता, पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे आने के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से नेताओं का मोहभंग होना रुक नहीं रहा है। बुधवार को टीएमसी की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इसके फौरन बाद वे असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के साथ नजर आईं। अटकलें हैं कि वे भाजपा में शामिल हो सकती हैं। इससे पहले कुछ सांसदों समेत, विधायक और पार्षद तक टीएमसी छोड़ चुके हैं।
आज सुष्मिता देव ने अपने पद से इस्तीफा दिया है। टीएमसी के लिए ये बड़ा झटका है, क्योंकि सुष्मिता को ममता बनर्जी का करीबी माना जाता है। इससे पहले सोमवार को टीएमसी के राज्यसभा सांसद शुखेंदु शेखर रॉय ने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके साथ ही उन्होंने टीएमसी भी छोड़ दी थी। शेखर रॉय 2011 में टीएमसी में शामिल हुए थे। उन्होंने पश्चिम बंगाल में फैले भ्रष्टाचार को अपना इस्तीफा देने की वजह बताया।
27 मई को लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने टीएमसी छोड़ दी थी। बाद में उन्होंने दावा किया कि करीब 20 टीएमसी सांसद एनडीएके साथ जाने की कोशिश कर रहे हैं। काकोली के साथ शताब्दी रॉय, बापी हलदर, अरूप चक्रवर्ती, जून मालिया, दीपक अधिकारी (देव), कालीपदा सरेन, जगदीश बसुनिया, असित मल, अबू ताहिर खान, खलीकुर रहमान, शर्मिला सरकार, प्रसून बनर्जी और पार्थ भौमिक हैं। कुछ सांसदों ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर बैठक की थी।
इससे पहले 3 मई को टीएमसी के 58 विधायक बागी हो गए थे और उन्होंने टीएमसी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुन लिया था। इन विधायकों की मांग पर स्पीकर ने ऋतब्रत को नेता विपक्ष भी घोषित कर दिया था। इस विवाद की शुरुआत कथित फर्जी हस्ताक्षर को लेकर हुई थी। इसके बाद असली बनाम नकली टीएमसी की लड़ाई भी शुरू हो गई। ये बागी विधायक पार्टी के चुनाव चिन्ह पर भी दावा कर रहे हैं।
कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने भी पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद केएमसी को भंग कर दिया गया और कमिश्नर स्मिता पांडे को प्रशासक नियुक्त किया गया। इसी के साथ 16 साल बाद केएमसी भी ममता के हाथ से निकल गई। हकीम को ममता का करीबी भी माना जाता था। वे नवंबर, 2018 में कोलकाता के मेयर बने थे। उनके भी भाजपा में जाने की अटकलें हैं।
विधाननगर नगर निगम की मेयर कृष्णा चक्रवर्ती ने भी टीएमसी छोड़ दी है। वे 2019 से मेयर थीं। उत्तर 24-परगना जिले के बैरकपुर नगरपालिका में अध्यक्ष समेत पार्टी के सभी 15 पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया था। इसी तरह भाटपाड़ा नगरपालिका में अध्यक्ष समेत पार्टी के 30, गारुलिया में 21 में से 10, हालीशहर में 16, कांथी में 17 में से 12, डायमंड हार्बर में 16 में 8 पार्षदों ने इस्तीफे दे दिए हैं।
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