कोटद्वार के विकास पर लगा ग्रहण: रोडवेज कार्यशाला के लिए आवंटित भूमि हुई निरस्त

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार। कोटद्वार। कोटद्वार विधानसभा क्षेत्र के अन्तर्गत विकास कार्यों पर लगातार कोई न कोई ग्रहण लगता जा रहा है। 22 करोड़ से अधिक की लागत से हो रहा कण्वाश्रम सौंदर्यीकरण व चिल्लरखाल-लालढांग मोटर मार्ग के काम को रोकने के बाद अब कोटद्वार में बनने वाले रोडवेज कार्यशाला के लिए चयनित भूमि दस साल बाद निरस्त कर दी गई है। कोटद्वार रोडवेज डिपो की कार्यशाला के लिए आवंटित भूमि नदी श्रेणी होने के चलते निरस्त हो गई है। भूमि निरस्त होने से रोडवेज कार्यशाला निर्माण का सपना अधूरा रहा गया है। हालांकि कोटद्वार रोडवेज डिपो के अधिकारियों का कहना है कि कार्यशाला के लिए जमीन की तलाश की जा रही है।
बता दें कि वर्ष 2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भुवनचंद्र खंडूड़ी के निर्देश पर कोटद्वार रोडवेज डिपो की कार्यशाला के लिए यहां खूनीबड़ में 0.265 हेक्टेयर भूमि चयनित की गई थी, लेकिन तब से कार्यशाला के निर्माण का मामला अधर में ही लटका रहा। वर्ष 2012 में कांग्रेस सत्तासीन हुई और तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी कार्यशाला के निर्माण को स्वीकृति प्रदान की, लेकिन बस अड्डे के आधुनिकीकरण का प्रस्ताव धरातल पर नहीं उतरा। वर्ष 2017 में विधानसभा चुनाव के बाद तीन जून 2017 को कोटद्वार आगमन के दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने एक बार फिर कार्यशाला के निर्माण को अपने घोषणा पत्र में शामिल किया, लेकिन चार साल बाद भी समस्या हल नहीं हुई। नतीजा उत्तराखंड परिवहन निगम के कोटद्वार डिपो का अपना बस अड्डा नहीं होने के कारण स्टेशन रोड स्थित कार्यशाला से ही बसों का संचालन होता आ रहा है। कार्यशाला में बसों को खड़ा करने के लिए पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण बसों का संचालन स्टेशन रोड से ही होता आ रहा है।

उत्तराखंड परिवहन निगम के कोटद्वार डिपो के एआरएम टीकाराम आदित्य ने बताया कि योजना के पहले चरण में खूनीबड़ में स्वीकृत भूमि पर वर्कशॉप का निर्माण और अस्थायी बस अड्डे के निर्माण की योजना थी, जबकि योजना के दूसरे चरण में स्टेशन रोड स्थित रोडवेज की कार्यशाला में बस अड्डा निर्माण की योजना प्रस्तावित था। उन्होंने कहा कि खूनीबड़ में स्वीकृति भूमि पर वर्कशॉप निर्माण के लिए आवंटित भूमि नदी श्रेणी की होने की वजह से भूमि निरस्त कर दी गई है। उन्होंने कहा कि वर्कशॉप निर्माण के लिए जमीन तलाशी जा रही है।

परिवहन मंत्री ने की थी 50 लाख की घोषणा
कोटद्वार। 28 दिसम्बर 2019 को शशिधर भट्ट राजकीय स्पोर्टस स्टेडियम में जिला फुटबॉल एसोसिएशन एवं स्व0 शशिधर भट्ट स्मृति खेल संस्था के तत्वाधान में पूर्व कोटद्वार नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष स्व0 शशिधर भट्ट की स्मृति में नेशनल स्तरीय गढ़वाल फुटबॉल कप प्रतियोगिता के शुभारंभ अवसर पर प्रदेश के परिवहन मंत्री यशपाल आर्य ने कोटद्वार में बस टर्मिनल निर्माण के लिए 50 लाख रूपये की घोषणा की थी। परिवहन मंत्री ने कहा था कि यह धनराशि 15 दिन के अंदर जारी कर दी जायेगी। बस टर्मिनल निर्माण में आठ करोड़ रूपये का खर्चा आयेगा। जो दो वर्ष में बनकर तैयार हो जायेगा, लेकिन एक वर्ष बाद भी रोडवेज कार्यशाला का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ परन्तु कार्यशाला निर्माण के लिए आवंटित भूमि निरस्त जरूर हो गई है।

राज्य बनने के बीस साल बाद भी नहीं मिला बस अड्डा
कोटद्वार। उत्तराखण्ड परिवहन निगम का कोटद्वार डिपो सबसे महत्वपूर्ण है। यहां से प्रतिदिन सैकड़ों यात्री बिजनौर, मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, दिल्ली, फरीदाबाद, गुड़गांव, जयपुर राजस्थान, चंडीगढ़, अमृतसर, हरिद्वार, देहरादून, ऋषिकेश सहित अन्य शहरों को आवाजाही करते है। त्योहार और शादियों के सीजन में तो डिपो से दिल्ली के लिए अतिरिक्त बसों का संचालन करना पड़ता है। सामान्य दिनों में जहां दिल्ली मार्ग पर करीब 24 बसों का संचालन डिपो से होता है तो त्योहार और शादियों के सीजन में 28 से 30 बसों का संचालन दिल्ली मार्ग पर करना पड़ता है। मैदानी मार्गों के अलावा पहाडी मार्गों पर भी डिपो की ओर से बसों का संचालन किया जाता है। लेकिन डिपो के पास बस अड्डा न होने से बसों का संचालन कार्यशाला से ही रहा है, कार्यशाला में भी पर्याप्त जगह न होने से अधिकांश बसों का संचालन स्टेशन रोड से ही होता है। उत्तराखण्ड राज्य बनने के बीस साल बाद भी कोटद्वार डिपो को बस अड्डा नहीं मिल पाया है। जबकि यह प्रदेश का सबसे महत्वपूर्ण डिपो है।

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