कोटद्वार की खोह नदी में प्रशासन को मिला मानकों के विपरीत खनन

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राजस्व, वन व सिंचाई विभाग की संयुक्त टीम ने किया खोह नदी का सर्वे
जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार। कोटद्वार भाबर की नदियों में नियमों के विरूद्ध चल रहे चैनलाइजेशन कार्य को लेकर आखिर प्रशासन नींद से
जाग गया है। रविवार को राजस्व, सिंचाई व वन विभाग की संयुक्त टीम ने खोह नदी का सर्वे किया। सर्वे के दौरान
प्रशासन की टीम ने खोह नदी में मानकों के विपरीत खनन की पुष्टि की है। टीम का कहना है कि नदी में दो से तीन
जगहों पर चैनलाइजेशन कार्य में एक चौथाई भाग नहीं छोड़ा गया है। वहीं दो से तीन जगहों पर गहरे गड्ढे पाये गये,
जहां बारिश होने पर जल जमाव हो सकता है। टीम ने पट्टा धारकों से पानी की निकासी के लिए नदी के बीच में गहरा
रास्ता बनाने को कहा। यदि किसी भी प्रकार की कमी पाई जाती है तो चैनलाइजेशन कार्य करने वालों के खिलाफ
नियमानुसार कार्यवाही की जायेगी।
रविवार को उपजिलाधिकारी योगेश मेहरा के नेतृत्व में राजस्व, सिंचाई और वन विभाग की टीम ने खोह नदी के
चारों पट्टों की पैमाइश की। एसडीएम योगेश मेहरा ने बताया कि रिवर ट्रेनिंग की सीमा 30 जून को समाप्त हो रही है।
इसीलिए सीमा समाप्त होने से पहले मूल्यांकन और निरीक्षण के दृष्टिगत बृहद पैमाइश की गई। रविवार को खोह नदी का
निरीक्षण किया गया। इस दौरान पाया गया कि दो-तीन जगह में चैनलाइजेशन कार्य में एक चौथाई भाग नहीं छोड़ा गया
है। जबकि एक चौथाई भाग छोड़ा जाना चाहिए था। उन्होंने बताया कि पट्टाधारकों के खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही की
जायेगी। वहीं दो-तीन जगह ऐसे पाये गये है यदि बारिश होगी तो जल जमाव हो सकता है और पानी इधर-उधर जा
सकता है। सुरक्षा की दृष्टि से ऐसे स्थानों को चिन्हित कर लिया गया है। साथ ही पट्टा धारकों को बताया जा रहा है कि
पानी की निकासी के लिए जगह बनाये, ताकि पानी को निकलने के लिए पर्याप्त स्थान मिल सके। एसडीएम ने बताया
कि शशिधर भट्ट राजकीय स्पोर्टस स्टेडियम की खोह नदी की ओर से सुरक्षा दीवार की नींव के पास गड्ढे खोदने की
शिकायत मिली थी। जिस पर पूर्व में पट्टा धारकों को नोटिस भेजकर बोल्डर लगाने को कहा गया था। नोटिस के बाद
पट्टा धारकों ने स्टेडियम की ओर से सुरक्षा दीवार के पास बोल्डर लगा दिये है। एसडीएम ने बताया कि सर्वे से मिलान
किया जा रहा है कि नदी से जितना उपखनिज उठाया जाना था उतना उठाया गया है या नहीं। अगर मानकों के अनुसार
उपखनिज उठा दिया गया होगा तो चैनलाजेशन कार्य बंद करा दिया जायेगा। उन्होंने बताया कि चैनलाइजेशन कार्य के
लिए सूर्योंदय से सूर्यास्त तक का समय निर्धारित किया गया है, अगर सूर्यास्त के बाद चैनलाइजेशन का कार्य करते हुए
पाया गया तो नियमानुसार कार्यवाही की जायेगी। पूर्व में भी सूर्यास्त के बाद चैनलाजेशन करते हुए जेसीबी और
पोकलैण्ड मशीनों को सीज किया गया था।

बॉक्स समाचार
मानकों के विपरीत खनन की हुई थी शिकायतें
खोह नदी में नियमों के विपरीत हो रहे चैनलाजेशन कार्य की शिकायत पूर्व में कई लोग कर चुके है। पूर्व में काशीरामपुर
तल्ला के पार्षद सूरज प्रसाद कांति, कुम्भीचौड़ के पार्षद अनिल रावत, काशीरामपुर तल्ला के लोगों ने स्थानीय प्रशासन
को लिखित शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन उस पर ध्यान नहीं दिया गया। अगर स्थानीय प्रशासन चैनलाइजेशन कार्य
के शुरूआत में ही जनता की शिकायत का संज्ञान ले लेता तो शायद आज नदी में 15-20 फुट गहरे गड्ढे नहीं दिखाई
देते। पार्षद सूरज प्रसाद कांति को चैनलाजेशन कार्य को फेसबुक पर लाइव दिखाने पर जान से मारने पूर्व ब्लॉक प्रमुख
द्वारा दी गई थी।
गत शनिवार को समाजसेवी कमलेश कोटनाला ने पट्टा संचालकों के खिलाफ कार्यवाही की मांग को लेकर निदेशक
भूतल एवं खनिकर्म इकाई को शिकायत पत्र भेजा था। कमलेश कोटनाला का कहना था कि बिना तोल के रमन्ना काटे
जा रहे है। मानकों की अनदेखी कर रिवर टे्रनिंग के पट्टे संचालकों को दिये गये है। रिवर ट्रेनिंग के तहत खोह, सुखरो
व सिगड्डी स्रोत में उपखनिज 1.5 मीटर चुगान की अनुमति दी गई थी। जिसका ई-रमन्ना बिना किसी तोल के काटा
जा रहा है। आज तक भी खोह और सुखरो नदी में कोई भी धर्मकाटा नहीं लगाया गया है। विभाग की लापरवाही के
कारण वर्तमान समय में खोह, सुखरो नदी को 15 से 20 मीटर गहरा खोदा गया है। नदी तल से मैदानी क्षेत्र में 300
मीटर की दूरी होनी चाहिए, ये उत्तराखण्ड नियमावली 2017 में प्रदर्शित है। वर्तमान में मालन व सुखरो नदी से लगे हुए
जितने भी भण्डारण स्वीकृत किये गये है, उनमें किसी की भी दूरी 300 मीटर नहीं है।

बॉक्स समाचार
प्रशासन ने स्टेडियम की बुनियाद पर लगाये बोल्डर
खोह नदी में चैनलाइजेशन कार्य के दौरान पट्टा धारकों ने खोह नदी से सटे शशिधर भट्ट राजकीय स्पोर्टस स्टेडियम की
सुरक्षा दीवार की बुनियाद को खोद डाला था। जिससे बरसात के समय स्टेडियम के बहने का खतरा बना हुआ था।
स्टेडियम के अधिकारियों और खेल प्रेमियों ने उपजिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर पट्टा धारकों के खिलाफ कार्यवाही की
मांग की थी। खेल प्रेमियों का कहना था कि कोटद्वार शहर में एक मात्र स्टेडियम है, जहां भविष्य के खिलाड़ी अभ्यास
करते है, लेकिन मानकों के अनुसार चैनलाजेशन कार्य न होने से स्टेडियम का खतरा बना हुआ। उनका कहना था कि
अगर यह स्टेडियम बह जायेगा तो सैकड़ों युवाओं के खिलाड़ी बनने का सपना टूट जायेगा। उपजिलाधिकारी ने खेल
प्रेमियों की शिकायत का संज्ञान लेते हुए पट्टा धारकों को नोटिस भेजकर स्टेडियम की सुरक्षा दीवार पर बोल्डर लगाने
को कहा। नोटिस मिलने के बाद पट्टा धारकों ने स्टेडियम की सुरक्षा दीवार पर बोल्डर लगवा दिये है। उपजिलाधिकारी
योगेश मेहरा ने बताया कि स्टेडियम की सुरक्षा दीवार पर बोल्डर लगवा दिये है।

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