कोटद्वार में भी उठ खड़ा हुआ किसान मोर्चा, बिल के विरोध में दिया धरना

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बोले पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए किये पारित
जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार। कोटद्वार में किसान मोर्चा किसान बिल के विरोध में उतर आया है। राष्ट्रीय किसान मोर्चा के सदस्यों ने किसान बिल के विरोध में तहसील परिसर में धरना दिया। उन्होंने कहा कि किसानों के हितों को नजर अंदाज करते हुए कृषि बिल पास किए गये है। किसान लगातार विरोध कर रहे है। फिर भी सरकार सुनने के लिए तैयार नही है।
रविवार को मोर्चा के सदस्यों ने किसान बिल के विरोध में तहसील परिसर में धरना दिया। इस दौरान उन्होंने केन्द्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कृषि उत्पाद व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सहायता) कानून-2020, मूल्य आश्वासन और कृषि सेवाओ के करारों के लिए किसानों का सशक्तिकरण और संरक्षण कानून-2020, आवश्यक वस्तु अधिनियम-2020 को वापस लेने की मांग को लेकर राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा है। इस अवसर पर किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष चौधरी आलम सिंह ने कहा कि यह कानून पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए पारित किये गये है। आवश्यक वस्तु अधिनियम 2020 के माध्यम से सरकार पूजीपंतियों को अनाजों की जमाखोरी करने की खुली छूट दे रही है। यह भारतीय खाद्य निगम बंद करने की साजिश है। यदि भारतीय खाद्य निगम बंद हो जाते है तो देश भर के गांव में कोटे की दुकान बंद हो जायेगी, जिससे गरीब और मजदूर भूखमरी की कगार पर पहुंच जायेगा। उन्होंने कहा कि किसानों की फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य की इस कानून में कहीं कोई भी गारंटी नहीं दी गई है। केन्द्र सरकार ने लॉकडाउन में किसानों की तरह मजदूरों को भी बर्बाद करने के लिए मजदूर के हित के 29 कानून खत्म कर दिये है। जिससे पूंजीपतियों को मजदूरों का शोषण करने का अवसर मिल गया है। धरना देने वालों में सतीश ओडवाल, श्यामलाल खंतवाल, चन्द्रमोहन, भूपेन्द्र सिंह, गोविन्द सिंह, धर्म सिंह, टीकाराम, इन्द्रादेवी, बूजमोहन वर्मा, आलम सिंह, दीपक रावत आदि शामिल थे।

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