कोटद्वार प्रशासन सनेह से नहीं हटा पा रहा आरबीएम का स्टॉक, क्षेत्रवासी खफा

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार। नगर निगम के वार्ड नंबर तीन सनेह के लोगों ने आबादी के बीच कृषि भूमि पर मानकों के खिाफ बनाये गये आरबीएम के स्टॉक को हटवाने की मांग प्रशासन से की है। उन्होंने जल्द ही स्टॉक न हटने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाते हुए कहा कि वह पिछले दो माह से स्टॉक हटाने की मांग कर रहे है, लेकिन जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे है। जिस कारण लोगों में आक्रोश पनप रहा है। लोगों का कहना है कि खनन कारोबारियों ने ग्रामीणों के विरोध के बावजूद भंडारण शुरू कर दिया है।
पार्षद धीरज सिंह नेगी ने उपजिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि सनेह मल्ली में घनी आबादी के बीच में कृषि भूमि पर आरबीएम का स्टॉक बनाया गया है। यहां पर खोह नदी से खनन कर उपखनिज एकत्रित किया जा रहा है। इस स्टॉक से लगी काश्तकारों की भूमि है। उपखनिज लेकर आ रहे वाहनों से सिंचाई नहर व पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त हो रही है। जिस कारण लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि गांव की संकरी सड़कों पर उक्त वाहनों की आवाजाही के कारण जहां दुर्घटना का खतरा बना हुआ है, वहीं सड़क व पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त हो रही है। लोगों का कहना है कि खनन कारोबारियों ने ग्रामीणों के विरोध के बावजूद भंडारण शुरू कर दिया है। ट्रैक्टरों और डंपरों की आवाज से ग्रामीण काफी परेशान हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र की सड़कें डंपर और ट्रैक्टर के योग्य नहीं है। डंपर और ट्रैक्टर चलने से ग्रामीण सड़कों को भी भारी क्षति पहुंचनी शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि खोह नदी की रूख गांव की ओर है। ऐसे में खोह नदी में आवासीय बस्ती के समक्ष खनन होने से गांव को खतरा हो सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर भंडारण बंद नहीं किया गया तो उन्हें उग्र आंदोलन करने पर विवश होना पड़ेगा। ज्ञापन देने वालों में पूर्व बीडीसी सदस्य बृजेन्द्र सिंह नेगी, हेमा देवी, शांति नेगी, कमला, मालती, कलावती, सम्पति, ऊमा, सुनीता, माया, रश्मि, सुशीला, पुष्पा, प्रमिला, अंशु, लक्ष्मी, ममता, आशा, राखी रावत, रेनू, मेनका, देवेश्वरी, लीला, सरोज, गणेशी, गंगोत्री, कमला, चन्द्रा, सपना, रेशमा, बबली, विमला, मनोरमा आदि शामिल थे।
बता दें कि सनेह क्षेत्र के लोगों ने पूर्व में भी उक्त भंडारण का विरोध किया था। प्रशासन द्वारा उपखनिज के भण्डारण की स्वीकृति शासन द्वारा जारी मानकों के खिलाफ दिये जाने का आरोप स्थानीय जनता ने लगाया था। जिस पर प्रशासन व खनिज विभाग द्वारा जांच किये जाने पर इस भंडारण को मानकों के विपरीत पाया गया। बावजूद इसके इस भंडारण की स्वीकृति को रद्द नहीं किया गया।

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