महिला हिंसा को रोकने को लेकर बनाए गए कानूनी प्रावधानों को सक्षम बनाने की जरूरत

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जयन्त प्रतिनिधि।
श्रीनगर गढ़वाल। भारत में महिला हिंसा के स्वरूप और समाधान विषय को लेकर गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा एक दिवसीय ऑनलाइन परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस मौके पर राजनीति विज्ञान विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. रामानंद गैरोला ने कहा कि महिला के प्रति हिंसा की घटना केवल भारत की ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए बढ़ती समस्या है। आज भी महिलाओं की स्थिति में बदलाव नहीं हुआ है। राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. एमएम सेमवाल ने कहा कि महिला हिंसा को रोकने को लेकर बनाए गए कानूनी प्रावधानों को और अधिक सक्षम बनाने की जरूरत है। महिला सुरक्षा क्षेत्र में शोध कार्यों को और आगे बढ़ाया जाए।
बतौर मुख्य वक्ता प्रो. हिमांशु बौड़ाई ने कहा कि महिला सुरक्षा को लेकर बने कानूनों को प्रभावी और सशक्त रूप से क्रियान्वित किए जाने की जरूरत है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं के प्रति हिसा की वारदातों में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। उन्होंने कहा कि शारीरिक हिंसा के साथ-साथ महिलाओं को मानसिक हिंसा भी दी जाती है। जिनका महिला के व्यक्तित्व पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। कोई भी वर्ग अथवा समुदाय हिंसा का शिकार होता है हमें उस पर बात करनी चाहिए। प्रो. हिमांशु ने कहा कि महिलाओं को केवल मां अथवा बहन बुलाने से या उनकी पूजा करने से ही स्थिति नहीं बदलेगी। हकीकत में उनके अस्तित्व और गरिमा के साथ उन्हें स्वीकार करने की जरूरत है। प्रो. आरएन गैरोला ने कहा कि महिलाओं से सम्बन्धित हिसा का स्वरूप भी बदल रहा है। बालिकाओं से लेकर महिला मजदूरों, घरेलू महिलाओं, विधवाओं, बूढ़ी माताओं सभी को महिला हिंसा का शिकार होना पड़ रहा है। राजनीति विज्ञान विभाग की फैकल्टी डॉ. राकेश नेगी ने कहा कि भारतीय सामाजिक व्यवस्था में नारी ने बहुत उतार चढ़ाव देखे हैं जहां एक ओर उसे देवी कहा जाता है वहीं दूसरी ओर उसे प्रताड़ना का भी शिकार होना पड़ता है। समाज में मानवीय शिक्षा का अभाव है। शोध छात्र सागर जोशी ने परिचर्चा का संचालन किया। अखिलेश, लक्ष्मण प्रसाद, शेखर नेगी ने भी परिचर्चा में विचार व्यक्त किए।

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