ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी पोलिंग बूथ पर पहुंचे, आपस में नहीं की बात

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भवानीपुर ,पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण के दौरान कोलकाता के भवानीपुर में एक दिलचस्प राजनीतिक पल देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी एक ही समय पर चक्रबेरिया स्थित कोलकाता नगर निगम के वार्ड नंबर 73 के एक मतदान केंद्र पर पहुंचे। हालांकि दोनों नेताओं के बीच कोई बातचीत नहीं हुई, लेकिन उनकी एक साथ मौजूदगी ने चुनावी माहौल को और गर्मा दिया। यह घटना उस समय देखने को मिली जब बुधवार सुबह दक्षिण बंगाल की 142 सीटों पर मतदान जारी है। भवानीपुर इस चुनाव में सबसे चर्चित सीटों में से एक बनकर उभरा है, जहां मुकाबला मुख्य रूप से सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के बीच माना जा रहा है।
भवानीपुर सीट का राजनीतिक महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह ममता बनर्जी का पारंपरिक गढ़ रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने यहां से सुवेंदु अधिकारी को मजबूत चुनौती के रूप में चुनावी मैदान में उतारा है। सुवेंदु अधिकारी नंदीग्राम सीट से भी चुनाव लड़ रहे हैं, जहां उन्होंने 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को हराया था। नंदीग्राम में पहले चरण में मतदान हो चुका है।
भवानीपुर का यह मुकाबला नंदीग्राम की चुनावी टक्कर का रीमैच माना जा रहा है। गौरतलब है कि सुवेंदु अधिकारी पहले ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी और शिष्य माने जाते थे, लेकिन 2021 चुनाव से पहले उन्होंने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था।
दोनों पार्टियों के लिए भवानीपुर सीट प्रतिष्ठा का सवाल बन गई है। तृणमूल कांग्रेस के लिए यह मुख्यमंत्री के अपने क्षेत्र की साख से जुड़ा मामला है, जबकि भाजपा और खासकर शुभेंदु अधिकारी के लिए यहां जीत हासिल करना एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने जैसा होगा।
भवानीपुर सीट 2011 से तृणमूल कांग्रेस का गढ़ रही है। वरिष्ठ नेता सुभ्रत बक्शी ने यहां से जीत हासिल की थी और बाद में सीट छोड़ दी थी, जिससे ममता बनर्जी मुख्यमंत्री बनने के बाद उपचुनाव के जरिए विधानसभा में पहुंचीं। उन्होंने 2016 में भी इस सीट को बरकरार रखा।
2021 में ममता बनर्जी ने नंदीग्राम से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें सुवेंदु अधिकारी से 1,956 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने भवानीपुर उपचुनाव जीतकर वापसी की और भाजपा उम्मीदवार प्रियंका टिबरेवाल को 58,000 से अधिक वोटों से हराया।
मतदान के बीच भवानीपुर एक बार फिर राजनीतिक सुर्खियों में बना हुआ है, जो राज्य की सियासत और वर्तमान चुनावी प्रतिस्पर्धा का केंद्र बन गया है।

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