मोदी कैबिनेट ने 39,290 करोड़ के 6 प्रोजेक्ट्स को दी मंजूरी, एटीएफ फंड और हाईवे नेटवर्क से बदलेगी देश की सूरत

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नई दिल्ली , देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और विमानन क्षेत्र को बड़े वित्तीय झटकों से बचाने के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को बड़ा फैसला लिया है। पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कुल 39,290 करोड़ रुपये के छह ऐतिहासिक प्रोजेक्ट्स को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है। इन बड़े फैसलों का सीधा असर देश की एविएशन इंडस्ट्री की बैलेंस शीट, कमर्शियल परिवहन व्यवस्था और विभिन्न राज्यों की इंटर-सिटी कनेक्टिविटी पर पड़ेगा। इस मेगा पैकेज में विमानन टर्बाइन ईंधन (एटीएफ) की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए विशेष फंड बनाने के साथ-साथ दिल्ली में प्रदूषण कम करने और चार प्रमुख राज्यों में राष्ट्रीय राजमार्गों के नेटवर्क को रफ्तार देने पर रणनीतिक फोकस किया गया है।
एयरलाइंस को डूबने से बचाएगा ?10,000 करोड़ का ‘प्राइस स्टेबलाइजेशन फंडÓ
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों में होने वाले भारी उतार-चढ़ाव से घरेलू विमानन कंपनियों को सुरक्षित रखने के लिए सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये का ‘एटीएफ प्राइस स्टेबलाइजेशन फंडÓ स्थापित करने का बड़ा ऐलान किया है। पश्चिम एशिया संकट के कारण एटीएफ की कीमतें मार्च 2026 में 60.5 रुपये से बढ़कर मई 2026 में 142 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई थीं, जिससे विमानन कंपनियों के मार्जिन पर गहरा असर पड़ रहा था।
इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने घरेलू परिचालन के लिए एटीएफ की कीमत 75.6 रुपये प्रति लीटर तय कर दी है। यह आत्मनिर्भर कोष घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह के परिचालन के लिए उपलब्ध रहेगा, जिससे हवाई यात्रियों को किराए में अचानक होने वाली बढ़ोतरी से राहत मिलेगी और विमानन क्षेत्र से जुड़ी करीब 77 लाख नौकरियों की रक्षा हो सकेगी।
राजधानी में पुराने ट्रकों और बसों की विदाई के लिए ?5,041 करोड़ मंजूर
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बढ़ते उत्सर्जन और जानलेवा वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए कैबिनेट ने एक बेहद सख्त और प्रभावी योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत दिल्ली की सड़कों से पुराने ट्रकों और बसों को पूरी तरह से हटाने का रास्ता साफ हो गया है। इस स्क्रैपेज और विदाई योजना के लिए सरकार ने 5,041 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजटीय प्रावधान किया है, जिससे दिल्ली-एनसीआर के पर्यावरण सुधार में बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है।
24,249 करोड़ से चमकेगा हाईवे नेटवर्क
देश के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को विश्वस्तरीय बनाने के लिए सरकार ने कुल बजट का लगभग 62 प्रतिशत हिस्सा, यानी 24,249 करोड़ रुपये केवल नई सड़क और राजमार्ग परियोजनाओं के लिए आवंटित किए हैं। इससे ओडिशा, तेलंगाना, मध्य प्रदेश और बिहार में माल ढुलाई और व्यापारिक परिवहन पहले से कहीं अधिक सुगम हो जाएगा।
ओडिशा के पूर्वी तट पर पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए रामेश्वर, कोणार्क और पारादीप को जोड़ने वाले कोस्टल हाईवे के निर्माण को हरी झंडी दी गई है, जिसके लिए 8,301 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। दक्षिण भारत में औद्योगिक परिवहन को तेज करने के लिए तेलंगाना में एनएच-63 और एनएच-563 के विभिन्न हिस्सों को फोर-लेन बनाने के लिए 7,597 करोड़ रुपये आवंटित हुए हैं। मध्य भारत के सड़क नेटवर्क को दुरुस्त करने के लिए मध्य प्रदेश में एनएच-347क्च के अपग्रेडेशन के लिए 4,415 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है। वहीं, बिहार में खगड़िया से पूर्णिया तक एनएच-31 और एनएच-231 के सेक्शन को चार लेन में बदलने के लिए 3,936 करोड़ रुपये पास किए गए हैं।
लॉजिस्टिक्स की लागत घटेगी, पैदा होंगे रोजगार के लाखों नए अवसर
कैबिनेट के इन छह प्रमुख फैसलों का समग्र विश्लेषण यह दर्शाता है कि सरकार का मुख्य फोकस लॉजिस्टिक्स की लागत कम करने, सुरक्षित व तेज यातायात सुनिश्चित करने और पर्यावरण को हो रहे नुकसान को रोकना है। जहां एक ओर एटीएफ स्टेबलाइजेशन फंड से एयरलाइंस को ईंधन के मोर्चे पर अप्रत्याशित वित्तीय झटकों से राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर 24 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली राजमार्ग परियोजनाओं के जमीन पर उतरने से संबंधित राज्यों में रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे। कुल मिलाकर, यह 39,290 करोड़ रुपये का आवंटन भारत की विकास गाथा और घरेलू आपूर्ति शृंखला को एक नई और मजबूत गति प्रदान करेगा।

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