देहरादून। दून मेडिकल कॉलेज के पीजी डॉक्टरों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी होने जा रही है। कॉलेज प्रशासन ने रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) के गठन को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। अब पीजी डॉक्टर अपनी कॉलेज, अस्पताल और हॉस्टल से जुड़ी समस्याओं को इस आधिकारिक संगठन के माध्यम से शासन-प्रशासन के समक्ष रख सकेंगे। इसमें नॉन पीजी जेआर को भी जोड़ने की बात कही गई है। बता दें कि पिछले साल सुरक्षा, सीसीटीवी कैमरों की कमी, डीडीआर और ड्यूटी के अत्यधिक घंटों जैसी समस्याओं को लेकर पीजी डॉक्टरों ने बड़ा धरना दिया था। उस समय भी आरडीए गठन के प्रयास हुए थे, लेकिन आपसी समन्वय की कमी के चलते मामला लटक गया था। सोमवार को पीजी चिकित्सकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्राचार्य डॉ. गीता जैन और एमएस डॉ. आरएस बिष्ट से मुलाकात की। अधिकारियों की सैद्धांतिक सहमति मिलने के बाद अब डॉक्टर कानूनी रूप से आरडीए के पंजीकरण की तैयारी में जुट गए हैं।प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों का बनेगा संगठनमेडिकल कॉलेजों डॉक्टरों को एक मंच पर लाने की कवायद भी तेज हो गई है। अभी तक यह प्रयास केवल व्हाट्सएप ग्रुपों तक सीमित थे, लेकिन अब इसे औपचारिक रूप दिया जा रहा है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों की एक बैठक दो मई को दून मेडिकल कॉलेज में बुलाई गई है। बैठक में सभी कॉलेजों के डॉक्टरों के जुटने की उम्मीद है। बैठक में संगठन की रूपरेखा, पदाधिकारियों के चयन और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इसके माध्यम से डॉक्टर अपनी मांगों को सामूहिक रूप से सरकार के सामने रख सकेंगे।