उत्तराखंड

फार्मासिस्ट के बिना दवा वितरण का किया विरोध

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नई टिहरी। प्रशिक्षित बेरोजगार डिप्लोमा फार्मासिस्ट वेलफेयर एसोसियेशन ने प्रदेश की पशु डिस्पेंसरियों में बिना फार्मासिस्ट के दवा वितरण का विरोध करते हुए कहा कि इस तरह दवा वितरण का काम किया जाना सीधे-सीधे ड्रग्स एंड फार्मेसी रेगुलेशन एक्ट 1948 उल्लंघन है। प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बेरोजगार फार्मासिस्ट वेलफेयर एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष जय प्रकाश ने कहा कि प्रशिक्षित बेरोजगार डिप्लोमा फार्मासिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन इस तरह दवा वितरण का पूर्ण रूप से विरोध करता है। उत्तराखंड में पशु डिस्पेंसरीयों की संख्या लगभग 1000 है, पर एक भी डिस्पेंसरी में फार्मासिस्ट नहीं है। इसलिए सभी डिस्पेंसरियों में फार्मासिस्ट के पद सृजित कर नियुक्तियां दी जाय। कहा कि फार्मासिस्ट न होने से हाल ही में एक जिले में नट फर सेल व सरकारी अस्पताल में आपूर्ति की जाने वाली दवाओं को बेचने का मामला भी सामने आया है। पशुपालन विभाग में पशुधन प्रसार अधिकारियों से दवा वितरण का कार्य करवाया जा रहा है। जबकि दवा की सही मात्रा एवं गुणवत्ता की सही जानकारी केवल प्रशिक्षित फार्मासिस्ट को होती है। फार्मासिस्ट नौकरी के लिए दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन सरकार उनको नियुक्त नहीं कर रही है। फार्मासिस्टों का काम अप्रशिक्षितों से लिया जा रहा है।

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