उत्तरकाशी। जनपद की सदियों पुरानी जल विरासत को संरक्षित करने की दिशा में स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन अथॉरिटी (सारा) ने विशेष पहल शुरू की है। जिले के ऐतिहासिक, पौराणिक एवं धार्मिक महत्व वाले पांच पारंपरिक धारे-नौलों का संरक्षण एवं पुनरुद्धार किया जाएगा। इसके लिए विभाग ने लोगों से ऐसे प्राचीन स्रोतों की प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है।सारा के उपनिदेशक सिद्धार्थ श्रीवास्तव ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य जल स्रोतों का पुनरुद्धार करना ही नहीं बल्कि उनसे जुड़ी ऐतिहासिक, पौराणिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षित करना है। कई पारंपरिक धारे-नौले आज अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे जल स्रोतों को चिह्नित कर उन्हें फिर से उपयोगी और संरक्षित स्वरूप में लाने की योजना है। विभाग ने जनपदवासियों से आह्वान किया कि उनके क्षेत्र में यदि कोई प्राचीन धारा या नौला है जिसका इतिहास या पौराणिक महत्व हो तो उसकी जानकारी सारा को दें।