परिवहन निगम में बयानबाजी पर एमडी ने लगाया प्रतिबंध

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देहरादून। रोडवेज में कर्मचारी नेताओं और संगठनों द्वारा मीडिया में बयानबाजी को लेकर प्रबंध निदेशक की ओर से प्रतिबंध लगा दिया गया है। आदेश में कहा गया
है कि अब डिपो स्तर पर कोई भी बयान देने के लिए सहायक महाप्रबंधक जबकि मंडल स्तर पर मंडलीय प्रबंधक को ही अधिकार होगा। मुख्यालय स्तर पर इस
संबंध में महाप्रबंधक संचालन, प्रशासन और तकनीकी को ही अधिकार होगा। आदेश के जारी होते ही कर्मचारी संगठनों में आक्रोश है। संगठनों ने इसे तुगलकी
फरमान बताते हुए इसे मानने से इनकार कर दिया है। रोडवेज में पिछले साल टाटा कंपनी की बसों को लेकर हुए विवाद के बाद से ही प्रबंधन कर्मचारी संगठनों पर
अंकुश लगाने की तैयारी में था। उस वक्त इन्हीं संगठनों की वजह से बसों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए गए थे, जो बाद में सही भी निकले। अब कर्मचारी
संगठनों द्वारा जो व्हाट्सअप ग्रुप बनाए गए हैं, उनमें अकसर निगम की कार्यशैली या वेतन संबंधी मुद्दों को लेकर आवाज बुलंद की जाती है। प्रबंध निदेशक रणवीर
सिंह चौहान ने आदेश दिए कि तय अधिकारी के अलावा अगर किसी ने मीडिया में बयान दिया तो कर्मचारी सेवानियमावली के तहत उसके विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया
जाएगा।
इस वजह से लगाया प्रतिबंध
रोडवेज में कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलने पर हल्द्वानी निवासी एक महिला ने उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग में शिकायत की। संज्ञान लेते हुए आयोग ने जीएम
संचालन दीपक जैन को नोटिस भेज जवाब मांगा है। मामले में व्हाट्सअप ग्रुप पर कुछ कर्मचारियों ने जीएम के विरुद्ध अभद्र भाषा का प्रयोग कर गलत टिप्पणीं
कर दी। महाप्रबंधक ने प्रबंध निदेशक से इस संबंध में शिकायत की तो प्रबंध निदेशक ने मीडिया में बयानबाजी पर प्रतिबंध लगाने के आदेश दे दिए।
रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रांतीय महामंत्री दिनेश पंत का कहना है कि संगठन के पदाधिकारी विभाग की गलती या लापरवाही पर आवाज उठाने के लिए ही
होते हैं। संगठन अपनी बात रखने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। हालांकि, कोई भी बात मीडिया में रखने से पहले उसकी सत्यता जरूर जांच लेनी चाहिए, ताकि
विभाग की छवि धूमिल न हो। संगठनों की आवाज को दबाने का प्रयास बर्दाश्त नहीं होगा। इसके संबंध में प्रबंधन से बात की जाएगी।
उत्तरांचल रोडवेज कर्माचारी यूनियन के प्रांतीय महामंत्री अशोक चौधरी ने बताया कि कर्मचारी सेवानियमावली में ऐसा कोई कोई प्रावधान नहीं है कि किसी संगठन के
पदाधिकारी अपनी बात मीडिया में नहीं रख सकते। कर्मचारी संगठन इसलिए ही बने होते हैं कि वे विभागीय में कर्मचारियों से जुड़ी समस्या के मुद्दे या विभागीय
कमियों को उजागर कर सकें। यूनियन इस आदेश को मानने के लिए बाध्य नहीं है।
उत्तराखंड रोडवेज इंप्लाइज यूनियन के प्रांतीय महामंत्री रविनंदन कुमार ने बताया कि प्रबंधन का यह आदेश टेड यूनियनों के अधिकारों पर कुठाराघात है। संगठनों का
ये कार्य होता है कि वे निगम प्रबंधन को मांग पत्र के माध्यम से कर्मियों की समस्याओं की जानकारी दें। अगर यह सूचना मीडिया को दी जाती है तो गलत ही
क्या है। कार्मिकों की आवाज दबाने का प्रयास है।

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