हरिद्वार। शासकीय और अशासकीय विद्यालयों में आगामी मासिक परीक्षाओं को लेकर छात्र-छात्राओं के साथ शिक्षक भी असमंजस की स्थिति में हैं। शिक्षा विभाग ने परीक्षा तिथियां घोषित कर दी हैं, लेकिन अधिकांश विद्यालयों में अब तक सभी विषयों की किताबें नहीं पहुंच सकी हैं। ऐसे में विद्यार्थियों की तैयारी अधूरी है और शिक्षक संगठनों ने भी परीक्षा कार्यक्रम पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। कक्षा 6 से 12 तक पूरे शैक्षणिक सत्र में चार मासिक परीक्षाएं आयोजित की जानी हैं। इनमें से पहली परीक्षा 22 मई से शुरू होगी, जबकि कक्षा 11 की परीक्षा 29 जुलाई को प्रस्तावित है। विद्यालयों का कहना है कि बिना पर्याप्त अध्ययन सामग्री और तैयारी के परीक्षा आयोजित करना छात्रों और शिक्षकों दोनों के लिए चुनौती बन गया है। कई छात्रों के पास पुरानी और क्षतिग्रस्त किताबें हैं, जिनके पन्ने तक गायब हैं। स्थिति को और कठिन बना रही है शिक्षकों की जनगणना ड्यूटी। कई शिक्षकों को प्रगणक के रूप में तैनात किया गया है, जिससे नियमित पढ़ाई प्रभावित हुई है। शिक्षकों के सामने एक ओर जनगणना कार्य की जिम्मेदारी है, तो दूसरी ओर बिना पर्याप्त तैयारी के परीक्षाएं कराने का दबाव।पीएम श्री जीजीआईसी ज्वालापुर की प्रधानाचार्या पूनम राणा ने बताया कि कई कक्षाओं में अभी तक सभी विषयों की पुस्तकें उपलब्ध नहीं हो पाई हैं और शिक्षिकाओं की कमी भी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि नए प्रवेश जारी हैं, जिससे शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।