विकासनगर। मानसून के दौरान पछुवादून में हर साल नदियां और बरसाती गदेरे कहर बरपाती हैं। हालांकि प्रशासन बरसात के नुकसान को कम करने के लिए हर साल बाढ़ सुरक्षा चौकियां खोलता है, लेकिन इन चौकियों पर मानव संसाधन के साथ ही आवश्यक संसाधन नहीं जुटाए गए हैं। 45497 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली पछुवादून तहसील में यमुना, आसन, शीतला, रवासन, स्वारना के साथ ही चार दर्जन से अधिक बरसाती खाले हैं जो हर बरसात में ऊफान पर आ जाते हैं। इस मानसून सीजन में भी पछवादून प्रशासन ने अब तक कोई तैयारी शुरू नहीं की गई है। यहां हर बरसात में बरसाती नालों का पानी बस्तियों में घुस जाता है जिससे बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो जाती है।वहीं यमुना, शीतला, आसन, स्वारना, रवासन का पानी भी पूर्व में कई बस्तियों में घुस कर कहर बरपा चुका है। बरसात में हर बार बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। बावजूद इसके प्रशासन लापरवाह बना हुआ है। आपदा प्रबंधन के नाम पर तहसील प्रशासन ने नौ बाढ़ सुरक्षा चौकियां स्थापित की हैं। हैरत कि बात है कि बाढ़ सुरक्षा चौकियों के नाम पर प्रशासन ने सिर्फ पंचायत भवनों को ही चिह्नित किया है। लेकिन इन चौकियों पर मानव संसाधन के साथ ही आवश्यक भौतिक संसाधन, जीवन रक्षक उपकरण व आपातकाल से निपटने में सहायक सामग्री मुहैया नहीं कराई गई है। कहीं ये लापरवाही लोगों को भारी न पड़ जाए।
पछुवादून में हर बरसात में ग्रामीणों की सैकड़ों बीघा जमीन नदियों की बाढ़ बहा ले जाती है। आसन नदी बाढ़ तीन सौ बीघा से अधिक कृषि भूमि का कटाव कर चुकी है। अब नदी का बहाव तेजी से गांव की ओर बढ़ रहा है, जिससे गांव की निचली बस्तियों को भी खतरा पैदा हो गया है। आसन की बाढ़ हर साल खेतों को फसल समेत बहा कर ले जाती है। बावजूद इसके नदी किनारे बाढ़ सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं।
बाढ़ चौकियों में नहीं हैं पर्याप्त इंतजाम: टेंट, पानी में तैरने के लिए लाइफ जैकेट और आवश्यक उपकरण, जीवन रक्षक दवाइयां, बेलचे, फावड़े, खूंटे, इंटरशूज, रेनकोट, बरसाती जर्सी, टॉर्च आदि के साथ ही आपदा किट जरूर होने चाहिए। लेकिन किसी भी बाढ़ सुरक्षा चौकियों पर आपदा से निपटने को पर्याप्त संसाधन नहीं हैं।