जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : शादी का झांसा देकर युवती से सात साल तक शारीरिक संबंध बनाने और बाद में शादी से इन्कार कर गाली-गलौज व जान से मारने की धमकी देने के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) रजनी शुक्ला की अदालत ने आरोपी राहुल कुमार को दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों से दोनों के बीच सहमति से प्रेम संबंध और शारीरिक संबंध होने की बात सामने आती है, जबकि शादी का झूठा वादा किए जाने का आरोप अभियोजन पक्ष युक्तियुक्त संदेह से परे साबित नहीं कर सका।

अभियोजन के अनुसार इंद्रानगर आमपड़ाव निवासी युवती ने 20 मार्च 2026 को पुलिस को तहरीर दी थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि करीब सात वर्ष पहले उसकी राहुल कुमार से जान-पहचान हुई थी। राहुल ने शादी का वादा कर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। युवती का आरोप था कि शादी की बात करने पर राहुल हर बार उसे टाल देता था। तहरीर में युवती ने गर्भवती होने, गर्भपात कराने तथा शादी के लिए पांच लाख रुपये, सोने की अंगूठी और कार की मांग किए जाने का भी आरोप लगाया था। साथ ही 17 फरवरी 2026 को शादी के लिए दबाव बनाने पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया गया था। पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना के बाद न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान पीड़िता अपने पूर्व आरोपों से पलट गई। उसने अदालत में बयान दिया कि राहुल के साथ उसका प्रेम संबंध था और दोनों शादी के लिए तैयार थे। उसने यह भी कहा कि राहुल और उसके परिवार ने शादी के लिए सहमति जताई थी। पीड़िता ने लगाए गए आरोपों से इन्कार कर दिया। उसकी बहन ने भी अभियोजन की कहानी का समर्थन नहीं किया। अदालत ने संबंधित न्यायिक नजीरों का हवाला देते हुए कहा कि शादी का वादा तभी झूठा माना जाएगा, जब वादा करते समय ही उसे निभाने की मंशा न हो और इसी झूठे वादे का महिला के शारीरिक संबंध बनाने के निर्णय से सीधा संबंध हो। अदालत ने माना कि अभियोजन आरोपी के खिलाफ आरोपों को युक्तियुक्त संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। इसके आधार पर राहुल कुमार को दोषमुक्त कर दिया गया।