जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : लगातार शिकायत के बाद भी समस्याओं का निराकरण नहीं होने से आक्रोशित जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने जबरन थोपे जा रहे ऑनलाइन कार्यों का बहिष्कार करने का ऐलान किया है। कहा कि शिक्षकों की अनदेखी किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

जिलाध्यक्ष भगत सिंह भंडारी की अध्यक्षता में सतपुली में बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में शिक्षकों ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता का विरोध किया। शिक्षकों ने केंद्र सरकार से शिक्षा के अधिनियम में आवश्यक संशोधन कर ऐसे शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने का स्पष्ट प्रावधान करने की मांग की। शिक्षकों ने विद्यालयों में लगातार बढ़ाए जा रहे ऑनलाइन कार्यों पर भी नाराजगी जताई। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षकों पर अनावश्यक रूप से थोपे जा रहे ऑनलाइन कार्यों की अधिकता के कारण शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। बैठक में निर्णय लिया गया कि जबरन थोपे जाने वाले अनावश्यक ऑनलाइन कार्यों का शिक्षक विरोध एवं बहिष्कार करेंगे। बैठक में न्यूनतम वेतनमान 17,140 रुपये की वसूली के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। प्रभावित शिक्षकों ने वसूली रोकने के लिए माननीय उच्च न्यायालय की शरण लेने का निर्णय लिया। बैठक में लक्ष्मण सिंह नेगी, मुकेश काला, बिपिन चौहान, पवन देवलियाल, मनोज रावत, रश्मि बिष्ट, चंद्रमोहन बिष्ट, पूरण सिंह रावत, राकेश, मनमोहन चौहान सहित अन्य शिक्षकों ने अपने विचार रखे। बैठक का संचालन जिला मंत्री भोपाल सिंह रावत ने किया।