तो इस वर्षा भी आंखों-आंखों में कटेगी पुलिंडा के ग्रामीणों की रात

Spread the love

जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : पिछले कई दशकों से दुगड्डा विकासखंड के अंतर्गत पुलिंडा गांव विस्थापन को तरस रहा है। दरसअल, अस्सी के दशक से भूस्खलन का दंश झेल रहे इस गांव के विस्थापन को सरकारी घोषणाएं तो तमाम हुई। लेकिन, गांव का विस्थापन आज तक नहीं हो पाया। हालात यह हैं कि बरसात में ग्रामीण खुद ही अपने घरों की छोड़ सुरक्षित स्थानों की ओर चले जाते हैं।
जनपद पौड़ी में आपदा की दृष्टि से एकमात्र पुलिंडा गांव अति संवेदनशील है। वर्ष 1971 में यह गांव भूस्खलन की जद में आया। उस दौरान देखते ही देखते गांव के करीब 12 मकान भूस्खलन की भेंट चढ़ गए, जबकि अन्य कई मकानों में दरारें पड़ गई। कई गोशाला ध्वस्त हुई व गौवंश भी अनायास काल का ग्रास बन गया। इसके बाद ग्रामीणों ने अपने आवास भूस्खलन जद से दूर तो बनाए। लेकिन, हर बरसात में भूस्खलन का खतरा नए सिरे से बनाए मकानों तक पहुंचने का अंदेशा हमेशा बना रहता है। ग्रामीण कई बार विस्थापन की मांग को लेकर आंदोलन भी कर चुके हैं। लेकिन, हर बार आश्वासन से आगे कुछ नहीं हुआ। कभी डेढ़ सौ से अधिक परिवार वाले इस गांव से पलायन के चलते अब करीब बीस-पच्चीस परिवार ही रह गए हैं।

वन कानून बने रोड़ा
विस्थापन को हुए प्रयास उत्तर प्रदेश शासनकाल में वर्ष 1996 में भू-वैज्ञानिकों की एक टीम ने गांव का सर्वे कर अन्यत्र विस्थापित किए जाने की संस्तुति की। लेकिन, कोई फायदा नहीं हुआ। वर्ष 2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री के निर्देश पर तत्कालीन आयुक्त ने गांव को लैंसडौन वन प्रभाग के अंतर्गत पापीडांडा खाम में विस्थापित करने की संस्तुति कर दी। वन भूमि हस्तांतरण की कार्यवाही भी शुरू कर दी गई, लेकिन आज तक स्थिति पूर्ववत है। शासन को भेजी रिपोर्ट उप निदेशक, भूवैज्ञानिक भूतत्व एवं खनिजकर्म इकाई पौड़ी गढ़वाल की ओर से अतिसंवेदनशील ग्राम पुलिंठा का सर्वे कर अगस्त 2021 को जिलाधिकारी को अवगत कराते हुए पुलिंडा के समीप दो भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र को चिह्नित करते हुए परिवारों की संख्या का उल्लेख किया गया, जिसमें उनके द्वारा कुछ प्रभावितों की उनके नाम भूमि को उपयुक्त तो कुछ की उपयुक्त होना नहीं पाया बताया गया। पुलिंडा गांव के विस्थापन को लेकर पूर्व में पापीडांडा में सर्वे भी किया गया। लेकिन, पापीडांडा खाम के आरक्षित वन क्षेत्र में होने के कारण यह योजना धरातल पर नहीं उतर पाई।

पांच परिवारों का होना है विस्थापन
पूर्व में जहां पूरे पुलिंडा गांव के विस्थापन की तैयारी थी, 2021 में हुए सर्वे के बाद पांच परिवारों को ही खतरे की जद में माना गया। साथ ही इन पांच परिवारों के पिस्थापन की कवायद शुरू हुई। लेकिन, पांच वर्ष बाद भी यह परिवार विस्थापित नहीं हो पाए हैं। प्रशासन की माने तो उक्त परिवार मैदानी क्षेत्र में भूमि देने के साथ ही पूरे गांव को विस्थापित करने की मांग कर रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *