गैस-पेट्रोल की किल्लत से मिलेगी राहत, 45 हजार टन एलपीजी लेकर भारत की ओर बढ़ा सुपरटैंकर

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नई दिल्ली ,खाड़ी देशों में भड़की युद्ध की चिंगारी ने भारतीय रसोईयों का बजट बिगाड़ कर रख दिया है। ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से देश में एलपीजी गैस की भारी किल्लत महसूस की जा रही है, जिससे आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ा है। इस संकट के बीच आसमान छूती महंगाई ने लोगों को खौफ में डाल दिया था, लेकिन अब समंदर के रास्ते एक ऐसी खबर सामने आई है, जो करोड़ों भारतीयों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। ब्लूमबर्ग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, गैस संकट को दूर करने के लिए एक विशालकाय भारतीय सुपरटैंकर राहत लेकर देश की तरफ बढ़ रहा है।
होर्मुज के खतरनाक रास्ते से आ रही है गैस की बड़ी खेप
लगातार गहराते गैस संकट के बीच ‘सर्व शक्तिÓ नाम का भारतीय सुपरटैंकर समुद्री रास्ते से उत्तर की ओर बढ़ता हुआ देखा गया है। रिपोर्ट के अनुसार, यह विशाल जहाज कम से कम 45,000 टन एलपीजी गैस से लदा हुआ है और शनिवार को इसे लारक तथा केसम आइलैंड के करीब ट्रैक किया गया। शिप ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, ओमान की खाड़ी से होते हुए इस टैंकर के भारत पहुंचने की पूरी संभावना है। हालांकि, अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि सुपरटैंकर ने होर्मुज के मुश्किल और ब्लॉक किए गए रास्ते को पूरी तरह पार कर लिया है या नहीं, लेकिन इसके भारत की ओर बढ़ने से एक बड़ी राहत की उम्मीद जाग गई है।
अमेरिका की सख्त नाकेबंदी में फंसे भारत के 14 जहाज
बीती 13 अप्रैल से अमेरिका द्वारा की गई सख्त नाकेबंदी और ईरान की तरफ से होर्मुज का रास्ता बंद किए जाने के कारण समंदर में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। इसी नाकेबंदी के चलते भारत के कम से कम 14 जहाज फारस की खाड़ी में ही फंसे पड़े हैं। बीच में दो भारतीय जहाजों ने होर्मुज से बाहर निकलने की कोशिश भी की थी, लेकिन ईरान की कड़ी चेतावनी के बाद उन्हें मजबूरन वापस लौटना पड़ा। वहीं, फाइनेंशियल टाइम्स की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट यह भी बताती है कि ईरान से कनेक्शन वाले लगभग 34 टैंकर अमेरिकी नाकेबंदी को चकमा देकर वैकल्पिक रास्तों से सुरक्षित निकलने में कामयाब रहे हैं।
नाकेबंदी से बचने के लिए समंदर में क्या है वैकल्पिक रास्ता?
अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना किसी अन्य देश की समुद्री सीमा के भीतर किसी जहाज को नहीं रोक सकती। ऐसे में जहाजों के पास एक खतरनाक लेकिन संभव वैकल्पिक रास्ता बचता है। यदि कोई जहाज ईरान के तटीय क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए चाबहार बंदरगाह तक पहुंच जाए और फिर वहां से दक्षिण की ओर मुड़कर अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा में प्रवेश कर ले, तो वह सुरक्षित निकल सकता है। इस रास्ते से जहाज सीधे महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात, कर्नाटक या केरल के बंदरगाहों तक पहुंच सकते हैं। इसके अलावा एक दूसरा रास्ता पाकिस्तान की समुद्री सीमा से होकर भी जाता है, लेकिन वहां से गुजरने में सुरक्षा का भारी जोखिम बना रहता है।
रसोई गैस के बाद अब पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर मंडरा रहा खतरा
युद्ध के इन हालातों में सिर्फ गैस ही नहीं, बल्कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी बड़ा खतरा मंडरा रहा है। बीते दिनों ही सरकार ने 5 किलो वाले छोटे गैस सिलेंडर के दाम में 261 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर पर सीधे 1000 रुपये की भारी बढ़ोतरी करके सबको चौंका दिया था। अब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आए जबरदस्त उछाल ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। इस सप्ताह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 126 डॉलर प्रति बैरल के चार साल के उच्चतम स्तर को छू गया। हालांकि अब यह 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है, लेकिन सरकारी सूत्रों ने साफ कर दिया है कि बदलते हालातों और बढ़ते घाटे को देखते हुए जल्द ही देश में पेट्रोल और डीजल के दामों में भी इजाफा देखने को मिल सकता है।

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