देहरादून। स्वच्छ शहर और स्वच्छ गांव की दिशा में सरकार की ओर से तमाम योजनाएं और अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन इन प्रयासों की सफलता में आम लोगों की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
आज भी कई जगह ऐसे मामले सामने आते हैं, जहां घर-घर कूड़ा उठाने की व्यवस्था होने के बावजूद कुछ लोग कूड़ा जंगलों, खाली प्लॉटों और सड़क किनारे फेंक देते हैं। इससे न केवल शहर और गांव की सुंदरता प्रभावित होती है, बल्कि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ता है। सवाल यह है कि जिस कूड़े को हम अपने घर से बाहर रखना चाहते हैं, उसे सड़क, जंगल या किसी दूसरे स्थान पर फेंककर क्या हम वास्तव में स्वच्छता के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं?
स्वच्छता केवल सरकारी व्यवस्था नहीं, बल्कि हमारी आदत, जिम्मेदारी और पहचान है। जरूरत है कि कूड़ा सड़क या सार्वजनिक स्थान पर फेंकने के बजाय कूड़ा उठाने वाली गाड़ी में ही डाला जाए (
और आसपास के लोगों को भी इसके लिए जागरूक किया जाए। सरकार सफाई की व्यवस्था कर सकती है, लेकिन अपने शहर और गांव को स्वच्छ रखने का संकल्प हर नागरिक को खुद लेना होगा।