स्थानांतरण नीति में बदलाव का शिक्षक संघ ने किया विरोध, आंदोलन की चेतावनी

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : राजकीय शिक्षक संघ ने शिक्षा विभाग की संशोधित स्थानांतरण नीति का विरोध करते हुए इसे शिक्षकों के हितों के खिलाफ बताया है। संघ का कहना है कि नई व्यवस्था के कारण वर्षों से दुर्गम विद्यालयों में सेवाएं दे रहे शिक्षक स्थानांतरण के अवसर से वंचित हो रहे हैं। साथ ही शिक्षक पोर्टल से सुगम-दुर्गम स्थानांतरण का विकल्प हटाए जाने पर भी नाराजगी जताई गई। संघ ने पूर्व की व्यवस्था बहाल करने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन शुरू किया जाएगा।
शाखा अध्यक्ष दीपक नेगी ने कहा कि शिक्षा विभाग 15 जुलाई से स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है, लेकिन फिलहाल केवल गंभीर बीमारी से ग्रसित शिक्षकों से ही अनुरोध के आधार पर आवेदन मांगे जा रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसे कई शिक्षक हैं, जो वर्षों से दुर्गम विद्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं और सुगम विद्यालयों में स्थानांतरण के पात्र हैं, लेकिन उन्हें आवेदन का अवसर नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम-2017 की धारा 13 और धारा 17(ख) के तहत स्थानांतरण की सात श्रेणियों को मान्यता दी गई है। इसके बावजूद विभाग केवल पांच श्रेणियों के आधार पर स्थानांतरण प्रक्रिया संचालित कर रहा है, जो अधिनियम की भावना के विपरीत और शिक्षकों के साथ अन्याय है। शिक्षक संघ ने मांग की कि सुगम से दुर्गम तथा दुर्गम से सुगम विद्यालयों में स्थानांतरण के इच्छुक सभी पात्र शिक्षकों से आवेदन लिए जाएं। साथ ही शिक्षक पोर्टल पर पूर्व की भांति दोनों श्रेणियों के स्थानांतरण का विकल्प उपलब्ध कराया जाए। संघ ने स्पष्ट किया कि यदि सातों श्रेणियों के अनुसार स्थानांतरण प्रक्रिया लागू नहीं की गई तो प्रदेशभर में आंदोलन किया जाएगा।

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