टीम दीपक ध्यानी का सफल हुआ विदेशों में फंसे उत्तराखण्डियों का घर वापसी मिशन

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार। दुबई में फंसे 330 उत्तराखण्डियों की सफल घर वापसी हो गई है। उत्तराखंड एसोसिएशन की इन लोगों को लाने में अहम भूमिका रही है। 330 लोगों को 3 चार्टर फ्लाइट से दुबई से दिल्ली और फिर 17 बसों से दिल्ली से उत्तराखंड लाया गया। 2001 में अपने दुबई प्रवास के समय दीपक ध्यानी ने कुछ साथियों के साथ मिल कर उत्तराखंड एसोसिएशन की शुरुआत की थी जो की 1000 नियमित मेंबर्स का समूह बन चुका हैं। तब से वहां काम करने वाले उत्तराखंडी होटेलियर्स उनसे जुड़े थे। वहां उन्होंने करीब 22 डेथ केसेस और कई सौ फंसे हुए लोगों को निकालने का काम किया। जिनमें से अधिकतर होटेलियर्स ही थे। इस वजह से भारत वापस आने के बाद भी होटेलियर्स और वहां के लोग उनसे जुड़े रहे।
कोरोना काल में मार्च के महीने से ही होटल और रेस्टोरेंट्स बंद होने लगे थे। हमारे बहुत से उत्तराखंडी इस दौरान बेरोजगार हो गए। शुरू में तो कुछ समय तक वो अपने बचे पैसो से काम चलाते रहे पर धीरे-धीरे मई तक हालात और गंभीर हो गए। वन्दे भारत के तहत फ्लाइट्स शुरू हुयी पर सबका नंबर आना उसमें मुश्किल था। कुछ जरूरी और बीमार लोगों का दीपक ध्यानी और एसोसिएशन मेंबर्स ने वन्दे भारत की फ्लाइट्स में आने का इंतजाम किया पर ज्यादातर को दिल्ली में क्वारंटाइन करना पड़ा। उनको दिल्ली में दीपक ध्यानी और मीणा कंडवाल ने काफी प्रयास करके उत्तराखंड तक भेजा। जून के महीने में सबके पैसे खत्म होने लगे और कई लोग बेघर तक हो गए। सबसे बुरे हालत उन लोगों के थे जिनको स्वस्थ्य सम्बन्धी दिक्कत थी या जो विजिट पे जॉब ढूंढ़ने गए थे। ऐसे 500 से अधिक लोग दीपक ध्यानी और उनकी टीम से संपर्क कर चुके थे। उनका दर्द ने देख पाने के कारण 20 जून को दीपक ध्यानी ने अपनी खुद की चार्टर्ड फ्लाइट बुक करके सबको लाने का फैसला किया। ये आईडिया उन्होंने उत्तराखंड एसोसिएशन और अपने परिचितों के बीच रखा। इतने महज और बड़े प्रोजेक्ट को देख कर कई लोगों ने समझाया की सरकार का इंतजार किया जाये और इतना बड़ा जोखिम न उठाया जाय। पर दुबई से 5 मित्र शैलन्द्र नेगी जो कि एसोसिएशन के भूतपूर्व अध्यक्ष और दुबई में क्रेडिट कंट्रोलर की जॉब करते हैं, गौतम चौधरी जो कि कैसिओ कंपनी में मार्केटिंग मैनेजर हैं, अरविन्द पंत जो कि डाक्यूमेंट्स क्लीयरिंग एग्जीक्यूटिव हैं, हेमू नयाल जो कि ऑफिस एग्जीक्यूटिव हैं और मनवीर गुसाईं जो कि पिंड दा ढाबा रेस्टोरेंट में काम करते हैं ने दीपक ध्यानी का जमीने तौर पे साथ देने का निर्णय लिया। 22 जून को टीम ने ये प्रोजेक्ट डिक्लेअर कर दिया और लोगों से अपने रजिस्ट्रशन करने को बोला।
वीरेंद्र नौटियाल जो कि एक एयरलाइन कंपनी चला चुके हैं उनके साथ मिल कर दीपक ध्यानी ने इंडिगो, एयर अरबिया और फ्लाई दुबई से बातचीत शुरू की और अंत में फ्लाई दुबई से सबसे काम रेट मिलने की वजह से पहली फ्लाइट 24 जून को बुक हो गई। 24 जून को ही हमने इंडियन एम्बेसी में परमिशन के लिए अप्लाई कर दिया। पर पालिसी चेंज हो गयी और हमे पूरी लिस्ट के साथ एयरलाइन के मार्फत अप्लाई करने को बोला। 30 जून तक हमको लिस्ट फाइनल करके एयरलाइन्स और एम्बेसी को देनी थी। टीम ने दिन-रात मेहनत की ताकि सबके डाक्यूमेंट्स जमा हो जाय। तय तारीक को डाक्यूमेंट्स दे दिए गए और सभी विभागों से परमिशन का सिलसिला शुरू हुआ। टीम पैसों के कलेक्शन में लगी रही। जो अपना शेयर दे सकते थे या जिनकी कम्पनी पेमेंट कर रही थी उनसे कलेक्शन किया गया और जो नहीं दे सकते थे उनके पैसे एसोसिएशन ने दिए। जिनके पास घर नहीं या खाने को नहीं था उनके लिए व्यवस्था की गई। 6 लोगों की टीम ने 7 जुलाई को 187 लोगों के साथ इस सफर की शुरुआत में दिन-रात लगा दिए। सारी परमिशन 5 जुलाई तक आ गयी पर लास्ट अप्रूवल जब नहीं आयी तो टीम घबराने लगी। उत्तराखंड सीएम ऑफिस और नागरिक उड्डयन विभाग को भी लिखा गया।
5 जुलाई को स्विट्जरलैंड से राजनयिक बीएस बिष्ट प्रोजेक्ट से जुड़े और उन्होंने भी अपने स्तर से प्रयास प्रांरभ किया। भारत से मीणा कंडवाल और जगमोहन सुन्द्रियाल ने भी प्रयास किया। पर मुद्दा भारत सरकार और यूएई सरकार के बीच का था और कुछ बात न बनने की वजह से सभी चार्टर्स रोक दिए गए। हमे 10 जुलाई की नयी तारीक मिली। किसी तरह से सबको समझाया पर 40 लड़के तब तक बेघर हो चुके थे, उनके लिए होटल की कमरों और खाने की व्यवस्था दीपक ध्यानी की टीम ने की, कुछ को मेंबर्स ने अपने घर पे रखा। इसी सब प्रयास में टीम का सबसे ज्यादा दौड़ने वाला सदस्य हेमू नयाल कोरोना संक्रमित हो गया। उनको आइसोलेशन में जाना पाड़ा पर उसने फोन से काम करना जारी रखा। 8 जुलाई को ये मुद्दा नेटवर्क टेन टीवी ने उठाया और न्यूज को सब तक पहुंचाया। 9 जुलाई को राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी इस मुद्दे को ले कर नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप पूरी के पास गए और उनको बताय। हरदीप पूरी ने उनको आश्वासन दिया और 12 से 26 जुलाई तक के लिए चार्टर्स की अनुमति हो गयी।
12 जुलाई के लिए 70 लोग फाइनल किये गए, जिनको कुमाऊं या देहरादून जाना था और 13 के लिए 151 लोग फाइनल किये गए जिनको टिहरी, उत्तरकाशी, चमोली और रुद्रप्रयाग जाना था। फिर से लिस्ट और डाक्यूमेंट्स दिए गए। टीम ने सबके लिए पीपीई किट की व्यवस्था की, एयरपोर्ट पे सबका कोविड-19 टेस्ट हुवा और 2 फ्लाइटस में 221 लोग दिल्ली आ गए। जहां दीपक ध्यानी एयरपोर्ट पे उनका इंतजार कर रहे थे।
आईजी संजय गुंज्याल की अनुसंशा पर और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के निर्देश पर उत्तराखंड परिवहन ने 12 जुलाई को 3 बसे और 13 जुलाई को 8 बसें एसडीआरएफ के नेतृत्व में दिल्ली भेजी। उत्तराखंड परिवहन जीएम संजय गुप्ता और एसडीआरएफ की कमांडेंट तृप्ति भट्ट के साथ दीपक ध्यानी ने पूरा रूट और किसे कहां और कैसे भेजना हैं इसकी प्लानिंग और व्यवस्था की। असिस्टेंट रेसिडेंट कमिसनर इला गिरी के निर्देश पर उत्तराखंड शासन के 2 प्रोटोकॉल ऑफिसर्स ने दीपक ध्यानी के साथ एयरपोर्ट पे सबके पास बनाये। मीना कंडवाल ने दिल्ली एयरपोर्ट पे सबके लिए भोजन और पानी की व्यवस्था की। रात को दोनों दिन बसें अपने-अपने गतंव्य की ओर रवाना की गई और सबको उनके गृह जनपद में सरकारी क्वारंटाइन किया गया, फिर सबको कोरोना टेस्ट के बाद अपनी-अपनी तहसील तक छोड़ा गया। कुछ लोगों को अन्य फ्लाइट में जगह मिल गयी फिर भी 101 लोग रह गए थे। जिनको 22 जुलाई को तीसरा चार्टर बुक करके बुलाया गया और 6 बसों से उनके गृह जनपदों तक छोड़ा गया। आज सभी अपना क्वारंटइान पूरा करके और कोरोना टेस्ट करा के अपने घरों को चले गए। दुबई से इन जिलों के आये लोग
टिहरी गढ़वाल के 132, पौड़ी गढ़वाल के 17, चमोली के 13, रुद्रप्रयाग के 36, उत्तरकाशी के 11, देहरादून के 44, हरिद्वार के 9, अल्मोड़ा के 7, बागेश्वर के 27, चम्पावत के 9, नैनीताल के 17, पिथौरागढ़ के 7, उद्यमसिंह नगर के 9 और दिल्ली में रहने वाले 16 उत्तराखंडी। इस तरह से 330 लोगों को 3 चार्टर फ्लाइट से दुबई से दिल्ली, फिर 17 बसों से दिल्ली से उत्तराखंड सभी के सहयोग से लाया गया। दीपक ध्यानी और उनकी टीम का ये भगीरथ प्रयास सफल हुआ जिसने उम्मीद खो चुके बेरोजगार नवयुवकों और बीमार लोगों को प्रदेश से अपने घरो तक सकुशल पहुंचाया।

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