चाई महोत्सव में बिखरे लोक संस्कृति के रंग, बेटियों और महिलाओं की प्रस्तुति ने जीता दिल

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : विकासखंड जयहरीखाल के ग्राम चाई में आयोजित महोत्सव के दूसरे दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रंगारंग प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया। महिलाओं और स्कूली बच्चों ने लोकगीतों एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। साथ ही गांव के समग्र विकास के लिए स्थानीय स्तर पर योजनाएं तैयार करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
महोत्सव के दूसरे दिन का शुभारंभ मुख्य अतिथि जिला पंचायत सदस्य पूनम नेगी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि चाई गांव अपनी अभिनव सोच और जनसहभागिता के कारण आज राज्य ही नहीं, बल्कि देशभर में एक मिसाल बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि गांवों के विकास की योजनाएं स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ग्रामीणों की सहभागिता से तैयार की जानी चाहिए। ग्राम प्रधान अंजू गुसांई ने कहा कि पहाड़ की प्राकृतिक संपदा और संसाधनों का संरक्षण समय की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा से ही पहाड़ का अस्तित्व सुरक्षित रह सकता है। पहाड़ी संस्कृति, सामाजिक ताना-बाना और परंपराएं हमारी अमूल्य धरोहर हैं, जिन्हें सहेजने की जिम्मेदारी हम सभी की है। कार्यक्रम में वक्ता सच्चिदानंद बुड़ाकोटी ने कहा कि चाई गांव के लोग सामूहिक सोच और प्रयासों के बल पर विकास की नई इबारत लिख रहे हैं। ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से गांव में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। गोष्ठी के बाद आयोजित सांस्कृतिक संध्या में महिलाओं और स्कूली बच्चों ने गढ़वाली, कुमाऊंनी तथा हिंदी गीतों पर मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। लोक संस्कृति की झलक से सजे कार्यक्रमों को दर्शकों ने खूब सराहा और कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर क्षेत्र पंचायत सदस्य मीनाक्षी बुड़ाकोटी, दीपक बुड़ाकोटी, ग्राम प्रधान अशोक बुड़ाकोटी, डॉ. पदमेश बुड़ाकोटी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

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