जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : दुगड्डा विकासखंड के अंतर्गत करीब तीन हजार मीटर की ऊंचाई पर स्थित भंवासी क्षेत्र में पहली बार हाथी की मौजूदगी दर्ज की गई है। अब तक गुलदार, भालू और जंगली सूअर के आतंक से जूझ रहे ग्रामीणों के सामने हाथी की आमद नई चुनौती बनकर उभरी है। पौखाल और भंवासी गांव के आसपास हाथी के विचरण की सूचना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों को जान-माल के साथ ही फसलों की सुरक्षा की चिंता सताने लगी है।
अब तक हाथियों की गतिविधियां मुख्य रूप से लैंसडौन वन प्रभाग के मैदानी क्षेत्रों तक ही सीमित रहती थीं। कोटद्वार के रामणी-पुलिंडा मार्ग, सनेह क्षेत्र, भाबर इलाके, कोटद्वार-दुगड्डा राष्ट्रीय राजमार्ग और ऐता गांव तक हाथियों की आवाजाही आम रही है। लेकिन इस बार हाथी दुगड्डा से आगे बढ़कर भंवासी क्षेत्र तक पहुंच गया, जो वन विभाग और स्थानीय लोगों दोनों के लिए चिंता का विषय है। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव एवं वरिष्ठ वन्यजीव वैज्ञानिक डॉ. दिनेश चंद्र भट्ट ने बताया कि पिछले दो दिनों से जयगांव, भटगांव बागी और भंवासी क्षेत्र के ग्रामीणों ने एक वयस्क हाथी को विचरण करते देखा है। उनके अनुसार, हाथी हिंवल नदी के किनारे वाले क्षेत्र में देखा गया है। हिंवल नदी आगे गरुड़ चट्टी के समीप गंगा में मिलती है। संभावना है कि यह हाथी हरिद्वार वन प्रभाग अथवा राजाजी क्षेत्र से भटककर यहां पहुंचा हो। डॉ. भट्ट ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में पहले से ही बाघ, गुलदार, भालू, जंगली सूअर और बंदरों के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में हाथी की आमद से फसलों को नुकसान और मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका भी बढ़ गई है। ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने और लोगों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।