प्रदूषण से तीन फीसदी जीडीपी का नुकसान है, इसे रोकने में मात्र एक फीसदी खर्च होगा

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नई दिल्ली, एजेंसी। वायु प्रदूषण आज पूरी दुनिया में एक बड़ी समस्या बन चुका है। पृथ्वी का तापमान बढ़ाने में वायु प्रदूषण की भी भूमिका है। दैनिक जागरण डट काम इस साल अर्थडे पर खास अभियान ष्कल की रौशनी आज बचाएंष् चला रहा है। इसके तहत हम पर्यावरणविदों और पर्यावरण के जुड़े विभिन्न मुद्दों पर काम कर रहे विशेषज्ञों के साथ बात कर रहे हैं। प्रदूषण की समस्या के विभिन्न पहलुओं को समझने और इस चुनौती से निपटने के विकल्पों पर हमने सेंटर फर साइंस एंड इनवायरमेंट के एक्सपर्ट विवेक चट्टोपाध्याय से बातचीत की।
दुनिया भर में जब वायु प्रदूषण की बात की जाती है तो भारत के कई शहर सबसे प्रदूषित शहरों में आते है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि भारत में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर नीतियां बहुत कमजोर हैं। और जो नीतियां हैं भी उनका पालन भी बहुत धीमी गति से हो रहा है। प्रदूषण के स्रोत लगातार बढ़ते जा रहे हैं। खास तौर पर गाड़ियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। अपनी ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने के लिए अभी भी हम काफी हद तक कोयले से चलने वाले पावरप्लांटों पर निर्भर हैं।
वायु प्रदूषण की समस्या देश के हर हिस्से में है। उत्तर भारत में हिमालय और आसपास पहाड़ी इलाकों के चलते प्रदूषण यहां जमा हो जाता है। ऐसे में सर्दियों के समय यहां कई बार धुंध दिखाई देती है। दक्षिण भारत में भी प्रदूषण है। लेकिन समुद्र होने के करीब होने के चलते वहां प्रदूषण एकत्र नहीं होता है।
वायु प्रदूषण के चलते हर साल लाखों लोग मर रहे हैं। प्रदूषण के चलते लोगों की प्रोडक्टिविटी कम हो रही है। प्रदूषण के चलते लोग बीमार हो रहे हैं जिससे देश को और लोगों को आर्थिक क्षति भी हो रही है। वायु प्रदूषण की समस्या इतनी गंभीर हो चुकी है कि पैदा होने वाले बच्चों के फेफडे कमजोर हो हैं। बड़े होने पर उन्हें कई तरह की सांस की बीमारियां हो रही हैं। प्रदूषण से तीन फीसदी जीडीपी का नुकसान है

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