ज्वैलर्स से लाखों की ठगी करने वाले तीन गिरफ्तार

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : ज्वैलर्स का विश्वास जीतकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों के कब्जे से छह लाख रुपये नकद और चार सोने की चेन बरामद हुई हैं। मामले में गिरोह का एक अन्य सदस्य अभी फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
कोतवाली प्रभारी निरीक्षक प्रदीप नेगी ने बताया कि 19 जुलाई को जौनपुर निवासी ज्वैलर विभाष अग्रवाल ने पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि कुछ समय पहले रघुवीर नाम का एक व्यक्ति उनके संपर्क में आया। शुरुआत में उसने असली सोने की अंगूठी गिरवी रखकर 25 हजार रुपये उधार लिए और तय समय पर रकम लौटाकर अपना गिरवी रखा आभूषण वापस ले लिया। इसके बाद वह कई बार इसी तरह लेन-देन करता रहा, जिससे ज्वैलर का उस पर पूरा भरोसा बन गया। कुछ समय बाद रघुवीर अपने एक साथी के साथ दुकान पर पहुंचा और बेटी की शादी का हवाला देकर अधिक धन की आवश्यकता बताई। उसने अपने साथ लाए आभूषणों के बदले नए सोने के आभूषण और करीब आठ लाख रुपये ले लिए। आरोपित ने जल्द ही रकम लौटाने का भरोसा दिया, लेकिन इसके बाद वह न तो वापस आया और न ही उसका मोबाइल फोन चालू मिला। खुद को ठगा महसूस होने पर ज्वैलर ने पुलिस से शिकायत की। जांच के दौरान पुलिस ने घटना स्थल और आसपास के क्षेत्रों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। फुटेज में रघुवीर के साथ तीन अन्य लोग भी नजर आए, जो वारदात के बाद नजीबाबाद जाने वाली बस में सवार होकर फरार हो गए थे। मंगलवार को मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने कोटद्वार रेलवे स्टेशन के पास घेराबंदी कर गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राजस्थान के अलवर जिले के खेड़ा पृथ्वीपुरा निवासी रघुवीर नायक, विक्रम भोपा और बलवीर के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार रघुवीर के खिलाफ उत्तर प्रदेश के संभल जिले में दो आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें एक एनडीपीएस एक्ट से संबंधित है। गिरोह का एक अन्य सदस्य नीरज, निवासी खेड़ा पृथ्वीपुरा (अलवर), अभी फरार है और उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार प्रयास कर रही हैं।

इस तरह देते थे वारदात को अंजाम
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह सुनियोजित तरीके से अलग-अलग शहरों में ज्वैलर्स को अपना निशाना बनाता था। शुरुआत में सदस्य असली सोने के आभूषण गिरवी रखकर छोटी-छोटी रकम लेते और समय पर ब्याज सहित पैसा लौटाकर ज्वैलर का विश्वास जीत लेते थे। कई बार ऐसा करने के बाद जब भरोसा पूरी तरह कायम हो जाता, तब वे सोने की परत चढ़े नकली आभूषण गिरवी रखकर उसके बदले असली सोने के आभूषण या बड़ी नकदी हासिल कर फरार हो जाते थे। वारदात के बाद सभी आरोपित अपने मोबाइल फोन बंद कर देते थे, जिससे उनका पता लगाना मुश्किल हो जाता था। पुलिस के अनुसार गिरोह ने कलालघाटी क्षेत्र के एक अन्य ज्वैलर को भी इसी तरह निशाना बनाने की योजना बनाई थी। आरोपी वहां पहुंचने ही वाले थे, लेकिन उससे पहले पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर बड़ी ठगी की वारदात होने से रोक दिया।

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