जीएमओयू की बसें यात्रा रूट पर जाने से बिगड़ी व्यवस्थाएं
पहाड़ी रूट पर समय से वाहन नहीं मिलने के कारण जन परेशान
जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : जीएमओयू को पहाड़ की रीढ़ कहा जाता है। दूर-दराज गांव तक जीएमओयू की बसें ही आवागमन का एक बेहतर साधन है। लेकिन, इन दिनों अधिकांश बसों के चारधाम रूट पर चले जाने से पहाड़ी की व्यवस्था बिगड़ने लगी है। पहाड़ी रूट पर आवागमन के लिए ग्रामीणों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। यही नहीं कई रूटों पर ग्रामीण निजी वाहन बुक कर आवागमन को मजबूर हो रहे हैं।
वर्तमान में चारधाम यात्रा का संचालन हो रहा है। ऐसे में कोटद्वार जीएमओयू में शामिल 44 बसों में से 24 बसें यात्रा रूट पर गई हुई हैं। यात्रा रूट पर गई अधिकांश बसें रिखणीखाल, यमकेश्वर सहित अन्य पहाड़ी रूट पर संचालित होती थी। ऐसे में बसों की कमी के कारण इन रूटों पर यात्रियों की समस्या बढ़ने लगी है। मजबूरी में ग्रामीण अधिक पैसे देकर निजी वाहनों से आवागमन कर रहे हैं। जिसका असर उनकी जेब पर पड़ रहा है। बस अड्डे में वाहन का इंतजार कर रहे श्याम सिंह ने बताया कि वह सुबह करीब पांच बजे दिल्ली से गांव जाने के लिए कोटद्वार पहुंच गए थे। लेकिन, दस बजे तक भी उन्हें अपने गांव के लिए वाहन नहीं मिल पाया है। मैक्स व अन्य सार्वजनिक वाहनों में पहले से ही सीट बुक हुई है। बताया कि उनका गांव रिखणीखाल से काफी दूर हैं। ऐसे में अब उन्हें वाहन बुक कर आवागमन करना पड़ेगा।
बॉक्स समाचार
छोटे रूट पर बढ़ी परेशानी
मैक्स व अन्य वाहन चालक इन दिनों मौके का खूब लाभ उठा रहे हैं। हालत यह है कि कई मैक्स वाहन चालक कोटद्वार से केवल लंबे रूट की ही सवारी बिठा रहे हैं। ऐसे में सबसे अधिक परेशानी आमसौड़, दुगड्डा, गुमखाल सहित अन्य रूटों पर जाने वाले यात्रियों को हो रही है। यही नहीं छोटे रूटों का किराया भी अधिक वसूला जा रहा है।