वर्षा काल में आबादी क्षेत्रों में बढ़ने लगी है हाथियों की धमक
जंगल में मच्छर व कीट से बचने को आबादी का रूख कर रहे हाथी
जयन्त प्रतिनिधि ।
कोटद्वार : वर्षा काल में जंगलो में पनप रहे मच्छर व अन्य कीट हाथियों को परेशान कर रहे हैं। नतीजा, हाथियों का झुंड इनसे निजात के लिए साफ व खुले स्थानों को तलाश रहे हैं। यही कारण है कि इन दिनों आबादी क्षेत्र के साथ ही कोटद्वार-दुगड्डा राष्ट्रीय राजमार्ग पर हाथियों की धमक बढ़ गई है। शनिवार देर शाम भी हाथियों का एक झुंड राष्ट्रीय राजमार्ग पर धमक गया था। इससे पहले हाथियों का यह झुंड आमसौड़ गांव में भी दिखाई दिया।
जंगल में घनी झाड़ी, अत्यधिक नमी व कीट-मच्छरों की भरमार ने हाथियों का जीना मुहाल कर दिया है। सुकून की तलाश में हाथी खुले स्थानों की ओर अपना रूख कर रहे हैं। लैंसडौन वन प्रभाग क्षेत्र से सटे ग्रास्टनगंज में लगातार हाथियों की धमक बढ़ रही है। दो दिन पूर्व हाथियों ने क्षेत्र के एक शिव मंदिर की दीवार को क्षतिग्रस्त कर दिया था। यही नहीं एक बगीचे में पहुंचे हाथियों ने यहां भी खूब उत्पात मचाया। कोटद्वार-दुगड्डा के मध्य राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी हाथियों की चहलकदमी बढ़ रही है। पिछले कुछ दिन से हाथी हाईवे पर पहुंचकर यातायात को प्रभावित कर रहे हैं। हाईवे पर हाथियों ने धमक ने राहगीरों की चिंता भी बढ़ा दी है। हाईवे के साथ ही हाथियों का झुंड आमसौड़ गांव तक पहुंच रहा है। ग्रामीण पूरी रात उठकर अपनी खेती की रखवाली करने को मजबूर हैं।
बॉक्स समाचार
चेतावनी बोर्ड तक नहीं
राष्ट्रीय राजमार्ग पर इन दिनों हाथियों की धमक बढ़ गई है। पांच से अधिक स्थानों पर हाथी जंगल से निकलकर हाईवे पर पहुंचता है। ऐसे में किस मोड पर हाथी टकरा जाएं कुछ कहा नहीं जा सकता। ऐसे में होना तो यह चाहिए था कि वन विभाग जगह-जगह चेतावनी बोर्ड लगाकर रहागीरों को सतर्क करता। लेकिन, कहीं भी इस तरह के चेतावनी बोर्ड नजर नहीं आ रहे। ऐसे में कब मानव वन्य जीवन संघर्ष की घटना हो जाएं कुछ कहा नहीं जा सकता।