…..मई माह की बारिश जल संस्थान के लिए वरदान

Spread the love

मई माह में लगातार बारिश होने से रीचार्ज हुए प्राकृतिक स्रोत
जयन्त प्रतिनिधि।
पौड़ी।
मई माह में हुई लगातार बारिश से जहां कुछ असुविधाएं हुई हैं वहीं जल संस्थान के लिए यह फायदेमंद साबित हुई है। जल संस्थान के अधिकारियों का कहना है कि बारिश से सभी प्राकृतिक स्रोत पूर्ण रूप से रीचार्ज हो गए हैं। जिससे गर्मियों में पेयजल किल्लत की संभावना नहीं है। हालांकि फिर भी जल संस्थान ने गर्मियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं भी तैयार की हैं।
गर्मियों का सीजन शुरू होते ही पौड़ी शहर के अलावा कई ग्रामीण क्षेत्रों में भयंकर पेयजल संकट रहता है। ग्रामीणों को कई किमी. दूर से पानी ढोने पर मजबूर होना पड़ता है। वहीं जल संस्थान को भी पेयजल किल्लत वाले क्षेत्रों में टेंकरों से पानी की आपूर्ति करनी पड़ती है। पौड़ी शहर के अलावा खिर्सू विकासखंड के कई गांवों में गर्मियों में पेयजल आपूर्ति जल संस्थान के लिए बड़ी चुनौती होती है। लेकिन इस जल संस्थान राहत में है। मई माह में हुई लगातार बारिश से पेयजल स्रोत लगभग पूरी तरह चार्ज हो गए हैं। जिससे अभी पेयजल संकट की कोई संभावना नहीं दिख रही है। वहीं 15 जून के बाद बारिश का मौसम शुरू हो जाएगा। जल संस्थान के अधिकारियों का कहना है कि अप्रैल अंतिम सप्ताह व मई प्रथम सप्ताह में पेयजल संकट गहराने लगा था। कई गांवों से पेयजल किल्लल की शिकायतें मिलने लगी थी। लेकिन मई माह की बारिश ने इस समस्या को दूर कर दिया है। अब पेयजल किल्लत की संभावना ना के बराबर है।

पौड़ी शहर में होती है प्रतिदिन 7 एमएलडी की खपत
पौड़ी शहर में प्रतिदिन 7 एमएलडी पेयजल की खपत होती है। जिसमें साढ़े तीन एमएलडी श्रीनगर अलकनंदा से तथा साढे़ तीन एमएलडी नानघाट पंपिंग पेयजल योजना से आपूर्ति होती है। मई माह में बारिश से नान घाट पेयजल योजना में भी प्रयाप्त पानी है। जिससे इस बार गर्मियों में पौड़ी शहर में पेयजल किल्लत नहीं होगी। वहीं श्रीनगर शहर में भी प्रतिदिन 8 एमएलडी पेयजल खपत होती है।

क्या कहते है अधिशासी अभियंता
जल संस्थान पौड़ी के अधिशासंी अभियंता शिव कुमार का कहना है कि मई माह में हुई लगातार बारिश से पेयजल स्रोत लगभग रीचार्ज हो गए हैं। जिससे पेयजल किल्लत की समस्या समाप्त हो गई है। 15 जून के बाद से फिर बारिश का मौसम शुरू हो जाएगा तो पेयजल किल्लत की संभावना ही समाप्त हो जाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!