नईदिल्ली,अमेरिका ने एक वार्षिक रिपोर्ट जारी की, जिसमें भारत को बौद्धिक संपदा अधिकारों के मामले में एक प्रमुख चिंता या प्राथमिकता वाला विदेशी देश बताया गया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय की 2026 की रिपोर्ट में रूस-चीन और वियतनाम जैसे अन्य देश भी शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, बौद्धिक संपदा के संरक्षण और प्रवर्तन के मामले में भारत दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना हुआ है। इसके क्या मायने हैं? आइए, जानते हैं।
व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय की वार्षिक रिपोर्ट में इस बात की समीक्षा की जाती है कि अमेरिका के व्यापारिक साझेदार पेटेंट, कॉपीराइट और ट्रेडमार्क जैसे बौद्धिक संपदा अधिकारों की कितनी प्रभावी ढंग से रक्षा करते हैं। इस वर्ष चिली, चीन, भारत, इंडोनेशिया, रूस, वियतनाम और वेनेजुएला सहित कई अन्य देशों को इस सूची में शामिल किया गया है। मेक्सिको सूची से बाहर निकल गया है क्योंकि मेक्सिको, अमेरिका और कनाडा अपने त्रिपक्षीय व्यापार समझौते की संयुक्त समीक्षा में लगे हुए हैं।
अमेरिका के मुताबिक, बौद्धिक संपदा संरक्षण के क्षेत्र में भारत ने कुछ प्रगति की है, लेकिन कई मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं। उसने पेटेंट प्रणाली में मौजूद समस्याओं का हवाला दिया, जिनमें देरी, अस्वीकृति का कारण बनने वाले सख्त नियम और पेटेंट रद्द होने की संभावना शामिल हैं। रिपोर्ट में कमजोर प्रवर्तन, पायरेसी, नकली उत्पादों की बिक्री और विभिन्न एजेंसियों के बीच सीमित समन्वय की ओर भी इशारा है। ट्रेडमार्क-कॉपीराइट मामलों सहित कानूनी प्रक्रियाओं में देरी का उल्लेख है।
अमेरिका ने वियतनाम को एक दशक से अधिक समय में पहली बार अमेरिकी व्यापार कानून के तहत सर्वोच्च श्रेणी, प्राथमिकता प्राप्त विदेशी देश घोषित किया गया है। यह श्रेणी उन देशों के लिए आरक्षित है, जिनके बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित सबसे गंभीर कृत्य अमेरिकी व्यवसायों को नुकसान पहुंचाते हैं। रिपोर्ट आने के 30 दिनों के भीतर यह निर्णय लेना होगा कि क्या व्यापार अधिनियम 1974 की धारा-301 के तहत औपचारिक जांच शुरू की जाए।
इस बार यूरोपीय संघ इसमें शामिल है और बुल्गारिया को इससे हटा दिया गया। पाकिस्तान, तुर्की और ब्राजील सहित 19 देश अलग से निगरानी सूची में हैं। अमेरिकी व्यापार मंत्रालय ने कहाकि वह अनुचित व्यापार प्रथाओं से निपटने के लिए प्रवर्तन उपकरणों का उपयोग करेगा।
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