अंतिम चेतावनी: शीशमबाड़ा प्लांट का संचालन कर रही रैमकी कंपनी को नोटिस जारी

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-कंपनी दे रही थी गलत रिपोर्ट, नगर निगम करेगा अब रोजाना मॉनीटरिंग
देहरादून। ढाई वर्ष के भीतर ही कूड़ा निस्तारण के बजाए कूड़े के पहाड़ से ढककर %फेल% हो चुके सूबे के पहले सॉलिड
वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की अब नगर निगम रोजाना मॉनीटरिंग करेगा। वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी को रोजाना इसकी
रिपोर्ट नगर आयुक्त को देनी होगी। प्लांट से उठ रही दुर्गंध की वजह से दस हजार लोगों की आबादी के परेशान होने और
कंपनी की मनमानी की शिकायत पर नगर आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने प्लांट में छापा मारा। इस दौरान कूड़े और
गंदगी के पहाड़ तो मिले ही, कूड़ा रिसाइक्लिंग में भी कमी पाई गई। नगर आयुक्त ने प्लांट का संचालन कर रही रैमकी
कंपनी को अंतिम चेतावनी देकर नोटिस जारी किया है। नगर आयुक्त ने कहा कि अगर सुधार नहीं हुआ तो निगम कंपनी
से करार तोड़कर दूसरी कंपनी को संचालन की जिम्मेदारी दे देगा। शीशमबाड़ा प्लांट के फेल होने से निगम की कार्यशैली
पर सवाल उठ रहे थे। लोगों का आरोप है कि जितना कूड़ा यहां आ रहा उसका निस्तारण नहीं हो रहा। आरोप है कि
रैमकी कंपनी कूड़ा निस्तारण के बजाए उसे सीधे ही लैंडफिल में डंप कर रही। साथ ही आरोप हैं कि कंपनी प्लांट तक
दैनिक मात्र में निर्धारित कूड़ा ले जाने के बजाए हरिद्वार बाइपास स्थित ट्रांसफर स्टेशन में भी उसको डंप कर रही। इसकी
दुर्गंध से स्थानीय लोगों को सांस की बीमारी होने लगी है। शिकायत के मद्देनजर सोमवार को नगर आयुक्त पांडेय ने
स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ शीशमबाड़ा का औचक निरीक्षण किया। कूड़ा निस्तारण बंद पाया गया। वहां कूड़े के पहाड़
मिले। कूड़े का गंदा पानी लिचेड भी वहीं समा रहा था, जबकि कंपनी को इसके लिए ट्रीटमेंट प्लांट लगाना था। नगर
आयुक्त ने कंपनी के प्रोजेक्ट हेड को फटकार लगाई और चेतावनी दी कि यह अंतिम बार है, जब कंपनी को बख्श रहे।
आयुक्त ने स्वास्थ्य अधिकारी को कंपनी पर जुर्माना लगाने का आदेश दिया।
कंपनी दे रही थी गलत रिपोर्ट
आयुक्त ने बताया कि कंपनी की ओर से प्लांट में हुए कार्य की दैनिक रिपोर्ट निगम को दी जाती है। निरीक्षण में पाया
गया कि कंपनी गलत रिपोर्ट दे रही थी। जितने कूड़े का निस्तारण बताया जा रहा, उससे आधा भी नहीं हो रहा। यही
वजह है कि आयुक्त ने निगम अधिकारियों को इसकी रिपोर्ट देने के आदेश दिए। अगर अब गड़बड़ी मिलती है तो निगम
अधिकारी भी जवाबदेह होंगे। रैमकी कंपनी की कार्यप्रणाली वास्तव में बेहद खराब मिली। न तो कूड़े का सही ढंग से
निस्तारण हो रहा, न ही गंदे पानी लिचेड का। जबकि, करार की शर्तों में तय हुआ है कि कंपनी रोजाना उठान के हिसाब
से कूड़े का निस्तारण करेगी। दुर्गंध की समस्या भी है और क्षेत्रीय लोगों की शिकायत भी सही है। कंपनी को अंतिम
चेतावनी दी गई है कि अगर अब शिकायत मिली तो निगम दोबारा मौका नहीं देगा। नगर आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने
बताया कि कंपनी गलत रिपोर्ट दे रही थी। इसलिए अब स्वास्थ्य अधिकारी यहां की रिपोर्ट देंगे। कंपनी नहीं सुधरी तो
करार को तोड़ दिया जाएगा।
लीक हुई थी सूचना
प्लांट से दुर्गंध को लेकर आयुक्त ने कंपनी पर सवाल उठाए हैं। बताया गया कि कंपनी को निरीक्षण की सूचना मिल गई
थी। इसके चलते कंपनी ने वहां एंजाइम के जरिए दुर्गंध दूर करने के पूरे प्रयास किए हुए थे, लेकिन कूड़े का तय
निस्तारण नहीं होने से मामला पकड़ में आ गया।

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