देहरादून। सड़क पर पैदल चलते हुए फोन पर बात कर रहे एक युवक से आईफोन छीनकर भाग रहे दो शातिर बदमाशों को पीड़ित ने साहस दिखाते हुए पीछा कर दबोच लिया। वारदात को अंजाम देने के लिए बदमाशों ने अपनी टैक्सी कार पर फर्जी नंबर प्लेट लगा रखी थी। स्थानीय लोगों की मदद से दोनों को पुलिस के हवाले कर दिया गया। पुलिस ने रविवार को दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया है। इंस्पेक्टर कैंट एसएस बिष्ट ने बताया कि पंकज नेगी निवासी अनारवाला गढ़ी कैंट शनिवार शाम करीब 5:20 बजे मिलिट्री अस्पताल के पास से पैदल जा रहे थे। इसी दौरान वह अपने आईफोन 12 पर बात कर रहे थे। तभी एक सफेद रंग की स्विफ्ट कार उनके पास आकर रुकी। कार में ड्राइवर के बगल में बैठे युवक ने झपट्टा मारकर उनका मोबाइल छीना और तेजी से गाड़ी दौड़ा दी। पंकज ने घबराने के बजाय तुरंत वहां से गुजर रहे एक व्यक्ति से लिफ्ट मांगी और बदमाशों का पीछा करना शुरू कर दिया। एसबीआई बैंक के पास उन्होंने स्विफ्ट कार को पकड़ लिया और अपना फोन उन बदमाशों से वापस छीन लिया। मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। जब स्थानीय लोगों ने पकड़ी गई कार की जांच की तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। कार पर दिल्ली के नंबर की सफेद यानी प्राइवेट नंबर प्लेट लगाई गई थी। लोगों को जब शक हुआ और उन्होंने उस प्लेट को हटाया तो उसके ठीक नीचे उत्तराखंड की असली टैक्सी नंबर प्लेट लगी हुई मिली। इसके बाद स्थानीय लोगों ने दोनों आरोपियों और कार को कैंट कोतवाली पुलिस को सौंप दिया। पुलिस ने पीड़ित की तहरीर पर दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।
सहारनपुर से दो बार जेल जा चुका है मुख्य आरोपी
कैंट कोतवाली प्रभारी ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान वसीम अहमद (25) मूल निवासी पुंवारका, सहारनपुर (हाल निवासी मॉडल कॉलोनी डालनवाला) और दानिश हसन (19) निवासी चूना भट्टा के रूप में हुई है। वसीम सहारनपुर से पहले भी दो बार जेल जा चुका है। घटना में इस्तेमाल की गई टैक्सी कार वसीम की ही है। पुलिस से बचने और वारदातों को अंजाम देने के लिए वह अपनी टैक्सी पर फर्जी प्राइवेट नंबर प्लेट लगा लेता था।