बिना नंबर वाहन को खनन सामग्री दी तो नपेगा क्रशर

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विकासनगर। खनिज परिवहन में अब बिना नंबर या अस्पष्ट नंबर वाले वाहनों को खनन सामग्री उपलब्ध कराना स्टोन क्रशर और अन्य संबंधित इकाइयों के लिए भारी पड़ सकता है। नियमों में ऐसे मामलों में केवल वाहन स्वामी ही नहीं, बल्कि उस स्टोन क्रशर, स्क्रीनिंग प्लांट, रिटेल भंडारणकर्ता अथवा अनुज्ञाधारक की जवाबदेही तय करने का भी प्रावधान है, जहां से उपखनिज लोड किया गया हो।
खनिज परिवहन में इस्तेमाल होने वाले वाहन के आगे और पीछे स्पष्ट वाहन संख्या प्रदर्शित होना अनिवार्य है। बिना वाहन संख्या, अस्पष्ट नंबर या वैध ई-रवन्ना के बिना उपखनिज परिवहन पाए जाने पर वाहन स्वामी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
सबसे अहम प्रावधान माल उपलब्ध कराने वाली इकाई की जिम्मेदारी को लेकर है। नियमों के मुताबिक यदि किसी बिना नंबर या अस्पष्ट नंबर वाले वाहन में लदा उपखनिज किसी स्टोन क्रशर, स्क्रीनिंग प्लांट, रिटेल भंडारणकर्ता या अनुज्ञाधारक से आया है तो संबंधित इकाई के खिलाफ जिला खान अधिकारी द्वारा ₹5 लाख का अर्थदंड अधिरोपित कर वसूल किए जाने का प्रावधान है। इसका मतलब यह है कि यदि जांच में यह सामने आता है कि किसी क्रशर या अन्य अधिकृत इकाई ने नियमों का उल्लंघन करते हुए ऐसे वाहन को खनन सामग्री उपलब्ध कराई, तो कार्रवाई केवल सड़क पर पकड़े गए वाहन तक सीमित नहीं रहेगी। जांच में यह भी देखा जाएगा कि वाहन में खनन सामग्री कहां से लोड हुई, ई-रवन्ना किस वाहन के नाम जारी हुआ और माल उपलब्ध कराने वाली इकाई की भूमिका क्या रही। ऐसे में खनन क्षेत्रों और क्रशर जोन में बिना नंबर अथवा अस्पष्ट नंबर वाले वाहनों के संचालन को लेकर विभागीय निगरानी भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
सवाल उठता है कि क्रशर से वाहन निकलते समय उसके नंबर और ई-रवन्ना का मिलान किया जा रहा है या नहीं। साथ ही ई-रवन्ना में दर्ज विवरण, वाहन और वास्तविक खनन सामग्री का भी सत्यापन जरूरी है।
यदि बिना नंबर वाला वाहन खनन सामग्री लेकर सड़क पर पकड़ा जाता है तो जांच केवल चालक या वाहन स्वामी तक सीमित न रहकर माल के स्रोत तक पहुंचनी चाहिए। दस्तावेजों और ई-रवन्ना की जांच से यह पता लगाया जा सकता है कि उपखनिज किस क्रशर, स्क्रीनिंग प्लांट, भंडारण स्थल अथवा अनुज्ञाधारक से आया था।
नियमों में प्रावधान स्पष्ट होने के बाद अब निगाह विभागीय कार्रवाई पर है। बिना नंबर या अस्पष्ट नंबर वाले खनिज वाहन पकड़े जाने पर क्या कार्रवाई केवल वाहन तक सीमित रहती है या माल उपलब्ध कराने वाली संबंधित इकाई तक भी जांच पहुंचती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

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