गड़बड़झाला: एक दिन में 89 मरीजों की मृत्यु का सनसनीखेज खुलासा

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निजी अस्पताल नहीं दे रहे मौत का सटीक आंकड़ा, 23 अस्पतालों को भेजा पत्र
देहरादून, ब्यूरो। उत्तराखंड में कोरोनो के आंकड़ों को लेकर पहले से ही असमंस की स्थिति बनी हुई है और अब मौत के आंकड़ों में भी एक नया खेल सामने आया है। उत्तराखंड में स्वास्थ्य विभाग ने जो आंकड़ें पेश किए वह दिल दहला देने वाले है । इन आंकड़ों में उत्तराखंड में अकेले एक दिन में 95 मौतों को दर्शाया गया है, जबकि स्वास्थ्य बुलेटिन ने शनिवार को छह मौते ही दर्शायी।
कोरोना महामारी से जूझ रहे उत्तराखंड प्रदेश में आंकड़ों का खेल अब विश्वास की कसौटियों से उतर चुका है, कभी संक्रमितों की संख्या रिकार्ड तोड़ देती है तो कभी ऐसा लगता है मानो उत्तराखंड में कोरोना की गति थमती हुई नजर आ रही है। आंकड़ों के खेल में अब एक नया गडबड़झाला सामने आया है जिसे अब तक के मौत के आंकड़ों पर ही सवालिया निशान खड़े कर दिए है।
शनिवार शाम उत्तराखंड स्टेट कंट्रोल रूम द्वारा प्रदेश में अब तक कुल मौतों की संख्या 924 बताई गई थी, जबकि इससे पूर्व जारी किए गए शुक्रवार के बुलेटिन में उत्तराखंड में मृत्यु का आंकड़ा 829 था, यानि विभाग का हैल्थ बुलेटिन खुद यह बता रहा था कि एक दिन में शुक्रवार से शनिवार तक 95 लोगों ने कोरोना से संक्रमित होने के बाद अपनी जान गवांई। विभाग द्वारा शनिवार को एक दिन में छह मौतों की ही पुष्टि की गई। स्पष्ट है कि उत्तराखंड स्टेट कंट्रोल रूम एवं प्रदेश के सरकारी व निजी अस्पतालों के बीच कोई समन्वय नहीं है। इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया गया है और स्वास्थ्य विभाग में अपर निदेशक डा. अभिषेक त्रिपाठी के हस्ताक्षरयुक्त पत्र भेजा गया है। इन 23 अस्पतालों में प्रदेश के समस्त मेडिकल कालेजों के साथ कैलाश अस्पताल, सिनर्जी अस्पताला, मैक्स अस्पताल सहित प्रदेश के अन्य प्रमुख अस्पताल शामिल है। पत्र में कहा गया है कि मृत्यु का आंकड़ा अनुरोध करने के बावजूद समय पर उत्तराखंड स्टेट कंट्रोल रूम कोविड-19 को उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। यह पत्र एवं सरकारी आंकड़े खुद दर्शा रहे है कि राज्य में कोविड- 19 से संबंधित आंकड़ों को लेकर नोडल एजेंसी एवं अस्पताल किस प्रकार अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे है। इन अस्पतालों की लापरवाही के कारण 89 मौंतो का आंकड़ा देर से प्राप्त हुआ और यदि डैथ आडिट न कराया जाता तो शायद यह हकीकत कभी सामने ही न आती। सीधे तौर पर यह एक गंभीर चूक है, जिसकी जांच होने के साथ ही लापरवाह अस्पताल प्रबंधनों के खिलाफ सख्त कार्यवाही होनी चाहिए।
जिस प्रकार से प्रदेश में आंकड़ों का खेल दिखाया जा रहा है वह पूरी तरह से अब भ्रमित करने वाला ही लग रहा है और कहीं न कहीं संक्रमण की हकीकत को छिपाने के लिए एक गेम प्लान के तहत आंकड़े पेश किए जा रहे है।

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