हरिद्वार में मासूम से दरिंद्गी के मामले की फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी सुनवाई, फांसी की सजा होने तक पुलिस टीम करेगी पैरवी

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हरिद्वार। उत्तराखंड सरकार हरिद्वार में 11 साल की मासूम से दुष्कर्म और हत्या के मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट कराएगी। मासूम से दरिंद्गी की जांच के लिए डीआईजी गढ़वाल नीरू गर्ग की अध्यक्षता में एक विशेष टीम गठित होगी। यह टीम पूरे मामले की तब तक मनिटरिंग करेगी, जब तक आरोपियों को कानून के तहत फांसी की सजा नहीं हो जाती।
आरोपियों को सजा होने तक विशेष टीम न्यायालय में पैरवी करेगी। यह घोषणा संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने बृहस्पतिवार को विधानसभा में की। उन्होंने सदन में फरार आरोपी पर ईनाम की राशि 20 हजार से बढ़ाकर एक लाख रुपये करने की घोषणा भी की। कौशिक के मुताबिक, सचिव गृह व पुलिस महानिदेशक को कह दिया गया है कि प्रकरण की वर्तमान में जो भी टीम जांच कर रही है, उसका नेतृत्व डीआईजी गढ़वाल ही करेंगी।
बृहस्पतिवार को सदन में कांग्रेस ने यह मामला उठाया तो विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने सरकार को निर्देश दिए कि वह पुलिस प्रशासन को सचेत करे कि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। पुलिस प्रशासन ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई करे।
इससे पूर्व विधानसभा सत्र के चौथे दिन सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने नियम 310 की सूचना के जरिये मासूम से दरिंद्गी का मामला उठाया। अध्यक्ष ने उनकी सूचना को नियम 58 में परिवर्तित कर सदन में रखने की अनुमति दी। नेता प्रतिपक्ष ड़ इंदिरा हृदयेश, विधायक प्रीतम सिंह, हरीश धामी, ममता राकेश और आदेश चौहान ने घटना को शर्मनाक, वीभत्स और जघन्य बताया। उन्होंने दूसरे आरोपी के फरार होने पर पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि यह निर्भया जैसी घटना है।
उन्होंने मामले की सीबीआई जांच कराने, ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने व प्रकरण की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में करने की मांग उठाई। उनका कहना था कि देवभूमि और कुंभ से पहले हुई इस घटना से देश में बुरा संदेश गया है।
इस पर संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने कहा कि इस मामले में पुलिस ने पस्को समेत उन सभी संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है, जिसमें ऐसे जघन्य अपराधों के लिए फांसी की सजा का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि सरकार दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगी। जब तक दोषियों को सजा नहीं सुना दी जाती, पुलिस इस मामले को देखेगी और न्यायालय में पैरवी करेगी।

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