जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : यदि आप जंगल से सटे मार्गों पर आवागमन कर रहे हैं तो जरा सावधान हो जाएं। दरअसल, इन दिनों हाथी सहित अन्य वन्य जीव जंगल के बाहरी खुले हिस्सों में नजर आ रहे हैं। हालांकि, लैंसडौन वन प्रभाग की ओर से क्षेत्र में हाथियों व अन्य वन्य जीवों पर नजर रखने के लिए क्यूआरटी टीमों का गठन किया गया है।

गढ़वाल के प्रवेश द्वार कोटद्वार का अधिकांश भाग जंगल से सटा हुआ है। यही कारण है कि जंगल से सटे मार्गों पर आए दिन जंगली जानवरों की धमक बनी रहती है। लेकिन, कुछ माह से मार्गों पर हाथियों की धमक अधिक दिखाई दे रही है। दरअसल, वर्षाकाल के दौरान जंगल में मच्छर व कीड़े हाथियों को परेशान करते हैं। ऐसे में वह राहत के लिए खुले स्थानों को खोजते हैं। जंगल से सटे मार्गों पर हाथियों की चहलकदमी के दौरान वाहनों के शोर और तेज हार्न से वह परेशान हो रहे हैं। इससे कई बार हाथी आक्रामक होकर राहगीरों और वाहन चालकों का पीछा करने लगते हैं, जिससे दुर्घटना और मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा बढ़ गया है। एक सप्ताह पूर्व हाथियों ने कोटद्वार-पुलिंडा मार्ग पर कुछ दोपहिया वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया था। मौके पर मौजूद लोगों ने भाग कर अपनी जान बचाई। करीब एक माह पूर्व हाथियों ने सिद्धबली के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी खूब तांडव मचाया। हाथियों ने एक टैंपू ट्रेवल वाहन सहित चार अन्य वाहनों को नुकसान पहुंचाया था। वहीं, इन दिनों हाथियों द्वारा लोगों को दौड़ने की घटनाएं भी लगातार बढ़ गई है। ऐसे में आवश्यकता है कि आमजन आवागमन में विशेष सावधानी बरते।
ग्रास्टनगंज में पहुंचा हाथियों का झुंड
ग्रास्टनगंज क्षेत्र में इन दिनों लगातार हाथियों की धमक बढ़ रही है। रविवार रात करीब दस बजे ग्रास्टनगंज में हाथी धमक गए थे। इसके कारण लोगों में दहशत बनी हुई थी। देर रात सूचना के बाद मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने हाथियों को वापस जंगल में खदेड़ा।
इन मार्गों पर बढ़ा वन्य जीवों का खतरा
लैंसडौन वन प्रभाग क्षेत्र के अंतर्गत कोटद्वार-पुलिंडा मार्ग, कोटद्वार-दुगड्डा राष्ट्रीय राजमार्ग, ध्रुवपुर-कण्वाश्रम मार्ग, सिद्धबली-सनेह मार्ग, कौड़िया-मोटाढांग मार्ग पर हाथियों की सबसे अधिक धमक बनी हुई है। पांच दिन पूर्व हाथी बीईएल के समीप आबादी क्षेत्र तक पहुंच गया था। जंगल से सटे मार्गों पर कब किस मोड पर हाथी टकरा जाएं कुछ कहा नहीं जा सकता। वर्षाकाल के दौरान जंगलों से सटे मार्गों पर झाड़ियां भी बढ़ चुकी हैं। जिससे मार्ग के आगे की स्थिति का पता नहीं चल पाता। ऐसे में खतरा और अधिक बढ़ गया है।
यह बरते सावधानी
1. हाथी दिखाई दे तो वाहन रोककर पर्याप्त दूरी बनाए रखें। उसके पास जाने या रास्ता रोकने की कोशिश न करें।
2. तेज हार्न और वाहन का शोर न करें। इससे हाथी उत्तेजित होकर आक्रामक हो सकता है।
3. हाथी को देखकर वाहन की गति न बढ़ाएं और न ही उसका पीछा करें।
4. हाथी के झुंड के बीच से निकलने की कोशिश बिल्कुल न करें। झुंड से सुरक्षित दूरी बनाकर उसके रास्ता छोड़ने का इंतजार करें।
5. हाथी के बच्चे के करीब न जाएं। बच्चे के आसपास होने पर मादा हाथी विशेष रूप से आक्रामक हो सकती है।
6. फोटो या वीडियो बनाने के लिए हाथी के करीब न जाएं। सेल्फी लेने का प्रयास भी न करें।
7. रात और सुबह के समय जंगल से सटे मार्गों पर विशेष सतर्कता बरतें, क्योंकि इस दौरान हाथियों की आवाजाही हो सकती है।
8. हाथी सड़क पर हो तो सुरक्षित स्थान पर रुकें और वन्यजीव को रास्ता दें।
9. हाथी सहित अन्य वन्य जीवों की मौजूदगी की सूचना तत्काल वन विभाग को दें, ताकि अन्य राहगीरों को भी सतर्क किया जा सके।