कोटद्वार की नदियों में दिखने लगा है मानकों के विपरीत खनन का असर, खोह व सुखरो में रूका बहाव, बन रही हैं झीलें

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार। बारिश के बाद खोह व सुखरौ नदी में बने गड्ढ़ों में पानी जमा होने से झील बन गई है। पानी का बहाव रूक जाने से सनेह व सुखरो क्षेत्र की हजारों की आबादी अनहोनी की आशंका से परेशान है। उक्त नदी किनारे बसे लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द पानी के लिए रास्ता खोलने की मांग की है। लोगों का कहना है कि अभी तक हल्की बारिश होने के बाद ही नदी में इतना पानी जमा हो गया तो लगातार दो-तीन दिन बारिश होने के बाद कैसे स्थिति होगी अंदाजा लगाया जा सकता है। खोह और सुखरो नदी में झील बनने की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इन फोटो पर लोग अपनी प्रतिक्रिया दे रहे है।
खोह व सुखरो नदी में शासन की ओर से चैनलाइजेशन की अनुमति दी गई थी। स्थानीय प्रशासन ने मार्च और जून माह में उक्त नदियों में चैनलाजेशन के लिए पट्टे आवंटित किये। पट्टाधारकों ने नियमों के विपरीत नदियों को मशीनों से 15 से 20 फुट तक खोद डाला। जबकि नियमानुसार नदी को तीन मीटर तक ही खोदा जा सकता है। स्थानीय लोगों ने कई बार शासन-प्रशासन से नियमों के विपरीत हो रहे खनन की शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का कहना था कि नियमों के विपरीत हो रहे खनन से बरसात के समय बाढ़ का खतरा बढ़ जायेगा। जनता की बात पर जिम्मेदार अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। नतीजा खोह और सुखरो नदी में गहरे-गहरे गड्ढ़े खोद दिये गये। विगत 28 जून को राजस्व, सिंचाई व वन विभाग की संयुक्त टीम ने खोह नदी का सर्वे किया। सर्वे के दौरान प्रशासन की टीम ने खोह नदी में मानकों के विपरीत खनन की पुष्टि की थी। नदी में दो से तीन जगहों पर चैनलाइजेशन कार्य में एक चौथाई भाग नहीं छोड़ा गया है। वहीं दो से तीन जगहों पर गहरे गड्ढे पाये गये थे, जहां बारिश होने पर जल जमाव हो सकता है। टीम ने पट्टा धारकों से पानी की निकासी के लिए नदी के बीच में गहरा रास्ता बनाने को कहा, लेकिन इसके बावजूद भी पट्टा धारकों ने पानी के लिए रास्ता नहीं खोला। शुक्रवार सुबह हुई मूसलाधार बारिश से खोह और सुखरो नदी का जलस्तर बढ़ गया। नदियों में पानी की निकासी न होने से चैनलाइजेशन के दौरान बने गड्ढ़ों में पानी जमा हो गया है और झील जैसा आकार ले लिया। उक्त दोनों ही नदियों को देखकर लग रहा है कि यह झील जानबूझकर बनाई गई है।
उपजिलाधिकारी योगेश मेहरा का कहना है कि खोह और सुखरो नदी में पूर्व में आवंटित चार पट्टों पर चैनलाजेशन की सीमा शासन के निर्देश पर 15 दिन तक बढ़ा दी गई है। उन्होंने बताया कि पट्टा धारकों को पानी के लिए रास्ता बनाने के लिए कहा गया है।

उप जिलाधिकारी ने पुलिस से पूछा खोह नदी में सीज पोकलैंड मशीन कहां है
जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार। उप जिलाधिकारी द्वारा कोटद्वार कोतवाली में तैनात एसएसआई को भेजा गया पत्र अपने आप में एक बहुत बड़ा सवाल बन गया है। आखिर क्यों उप जिलाधिकारी कोटद्वार को एसएसआई को पत्रा भेजकर पोकलैंड मशीन की वर्तमान स्थिति के संबंध में स्वयं उपस्थित होकर बताने की बात कही गई क्या वाकई में सीज की गई पोकलैंड मशीन गायब हो गई।
वर्ष 2019 में कोटद्वार की नदियों में रिवर ट्रेनिंग नीति के तहत चैनेलाइज का कार्य किया गया था तब प्रशासन ने 2 अगस्त 2019 को खोह नदी के गूलर पुल के समीप से बिना अनुमति के चैनलाइजेशन कार्य में लगी एक पोकलैंड मशीन को सीज कर पुलिस की सुपुर्दगी में दिया था और उप जिलाधिकारी कोटद्वार ने अपने पत्र संख्या 144 की चालानी रिपोर्ट में 3 अगस्त 2019 को मोहित कुमार पुत्र सतपाल सिंह निवासी मंडी धनोरा थाना धनोरा जिला अमरोहा उत्तर प्रदेश के नाम पर कुल 2,15,120 रूपये का अर्थदंड लगाया था, लेकिन अभी तक पोकलैण्ड मशीन के स्वामी के द्वारा अर्थदंड जिला खनिज फाउंडेशन पौड़ी के खाते में जमा नहीं कराया गया। अब उप जिलाधिकारी ने अपने पत्र में बताया कि 2 अगस्त 2019 को पोकलैण्ड मशीन पुलिस की सुपुर्दगी में दी गई थी 19 नवंबर को पोकलैण्ड मशीन के संदर्भ में वर्तमान स्थिति से अवगत कराने हेतु पुलिस को पत्र प्रेषित किया गया किंतु अभी तक पुलिस के द्वारा मशीन के संबंध में अवगत नहीं कराया गया है। उप जिलाधिकारी योगेश मेहरा ने बताया कि 2019 अगस्त माह का एक प्रकरण है। खोह नदी से एक पोकलैंड मशीन को सीज किया गया था। मामले में आरसी काटी गई थी। पोकलैंड स्वामी पर 215120 का अर्थदंड लगाया था। अभी तक एक लाख रूपये जुर्माना भरा गया है। उन्होंने बताया कि जुर्माना जमा न करने पर अनुज्ञापी से वसूला जायेगा। पुलिस की ओर से रिपोर्ट आ गई है।

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