मजदूरों ने प्रशासन पर लगाया लापरवाही का आरोप

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार। मजदूरों ने आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन की लापवाही के कारण वह अपने घर नहीं जा पा रहे है। उन्होंने कहा कि फोन करके उन्हें तहसील बुलाया गया कि उन्हें बस से हरिद्वार और वहां से टे्रन के माध्यम से बिहार भेजा जायेगा, लेकिन अब प्रशासन कह रहा है कि शासन का आदेश आया है कि मजदूरों को हरिद्वार न भेजा जाय और जो मजदूर जहां है उन्हें वहीं पर रोका जाय। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि सुबह से वह खाली पेट तहसील में बैठे है। प्रशासन ने उनके खाने की व्यवस्था भी नहीं की है।
कोटद्वार भाबर में किशनगंज बिहार के सैकड़ों मजदूर काम करते है। लॉकडाउन के बाद से उनका काम ठप पड़ गया है। काम बंद होने के कारण उनके सामने रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो गया। ऐसे में सभी मजदूर घर भेजने की मांग प्रशासन से कर रहे थे। गुरूवार को प्रशासन ने किशनगंज के सभी मजदूरों को तहसील बुलाया कि उन्हें उनके घर भेजा जा रहा है। गुरूवार सुबह सात बजे से ही किशनगंज बिहार के मजदूर कोटद्वार तहसील में पहुंचने लगे। प्रशासन ने इनका मेडिकल भी कराया। धनपुरा बिहार किशनगंज बिहारी निवासी जमीर अखतर ने कहा कि गत बुधवार को सांय को तहसील से फोन आया कि उनके घर जाने की व्यवस्था हो गई है। गुरूवार सुबह तहसील पहुंच जाना। इसलिए वह कमरा छोड़कर सुबह ही तहसील आ गये थे, लेकिन अब प्रशासन बिहार ने भेजने के बजाय कोटद्वार में अपने कमरे पर वापस जाने को कह रहा है। ऐसे में जाय तो कहा जाय। उन्होंने कहा कि अब मकान मालिक कैसे उसे कमरे में आने देगा। अकबर आलम, राहिद आलम ने आरोप लगाते हुए कहा कि तहसील के अधिकारी धमकी दे रहे है कि पश्चिम बंगाल और नेपाल के मजदूर तहसील में आ रहे है, इसलिए तहसील से अपने घर चले जाय नहीं तो डंडे मार के भगाया जायेगा। नयर आलम ने बताया कि वह सतपुली बाजार में काम करता है। सतपुली में वह दस अन्य साथियों के साथ 10 हजार रूपये में वाहन बुक कराके आये है। उन्होंने कहा कि उनके पास जो जमा पूंजी थी लॉकडाउन के दौरान वह सभी खत्म हो गई है। जो बचे हुए पैसे थे वह कोटद्वार आने में खर्च हो गये है।

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