मामले बढ़े तो खुलने लगी कोरोना इंतजामों की पोल

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देहरादून। दून में हर रोज विकराल होते जा रहे कोरोना संक्रमण के बीच अब इंतजामात की पोल भी खुलने लगी है। एकाएक मरीजों की संख्या बढ़ने से शहर के सबसे बड़े कोविड अस्पताल दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में बेड कम पड़ने लगे हैं। कमोबेश यही स्थिति निजी अस्पतालों की भी है। आइसीयू बेड तो न सरकारी में उपलब्ध हैं और न ही किसी निजी अस्पताल में। इससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी तादाद से मरीज बढ़े तो आने वाले एक सप्ताह में स्थिति भयावह हो सकती है। इस स्थिति में प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के बंदोबस्त क्या होंगे, इस पर भी स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। दून में कोरोना वायरस के संक्रमण की रफ्तार दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। एक सप्ताह से जिले में रोजाना दो से ढाई सौ नए मामले आ रहे हैं। मंगलवार को भी यहां 248 लोग कोरोना संक्रमित मिले। स्थिति कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिले में सक्रिय मरीजों (एक्टिव केस) की संख्या दो हजार के करीब पहुंच चुकी है। ऐसे में इलाज के इंतजाम अब नाकाफी साबित हो रहे हैं। अभी तक जिले में केवल दो सरकारी अस्पतालों एम्स ऋषिकेश और दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में ही कोरोना का इलाज किया जा रहा है। बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार ने निजी अस्पतालों को इलाज की अनुमति तो दे दी है, मगर ज्यादातर अस्पताल आगे नहीं आए। फिलवक्त दो निजी मेडिकल कॉलेज और दो निजी अस्पताल ही कोरोना का इलाज कर रहे हैं। यहां सामान्य मरीजों का भी उपचार किया जा रहा है, इसलिए कोरोना संक्रमितों के लिए बेड सीमित हैं।
गंभीर मरीजों की बढ़ती संख्या चिंता का कारण
जिले में एसिम्टोमेटिक (बिना लक्षण वाले) मरीजों के लिए कोविड केयर सेंटर बनाए गए हैं। इसके अलावा ऐसे मरीजों को होम आइसोलेशन में भी रखा जा रहा है। लेकिन, अब न सिर्फ गंभीर मरीजों की संख्या बढ़ी है, बल्कि मौत का ग्राफ भी। ऐसे में प्रशासन से लेकर स्वास्थ्य विभाग तक की चिंता बढ़ने लगी है।
कहां कितने बेड
अस्पताल-कुल बेड-आइसीयू बेड
एम्स ऋषिकेश-400-100
दून मेडिकल कॉलेज-298-35
श्री महंत इंदिरेश-120-20
हिमालयन-110-10
मैक्स-41-10
सीएमआइ-44-01
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अनूप कुमार डिमरी ने बताया कि कोरोना के इलाज के लिए निजी अस्पतालों से भी बात चल रही है। जल्द ही कुछ और अस्पतालों में कोरोना के लिए बेड आरक्षित कर दिए जाएंगे। ओएनजीसी, आइटीबीपी और सेना अस्पताल के अधिकारियों से भी बात हुई है।

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