ऑपरेशन मेघदूत में शहीद हुए थे सुशील चंद्र कंडवाल
जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : जिंदगी तो सभी जीते हैं, लेकिन खास वे लोग होते हैं जो किसी खाक मकसद के लिए जीते हैं। ऐसा ही एक उदाहरण बनी है देवी रोड डबराल कॉलोनी निवासी प्रीति कंडवाल। ऑपरेशन मेघदूत में शहीद हुए सुशील चंद्र कंडवाल की पुत्री प्रीति ने उनके पिता के सपने को साकार करके दिखाया है। प्रीति का चयन उत्तराखंड में चिकित्साधिकारी के पद पर हुआ है। प्रीति की यह सफलता केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि बलिदानी पिता को सच्ची श्रद्धांजलि है।
गुरुवार को देहरादून में जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने डा. प्रीति कंडवाल को नियुक्ति पत्र सौंपा तो यह बलिदानी के परिवार के लिए अत्यंत भावुक पल था। प्रीति की माता मीनाक्षी कंडवाल को वह पल याद आया जब पिता ने बेटी को पहली बार गोद में उठाया और उसे भविष्य में डॉक्टर बनाने की बात कही थी। मीनाक्षी कंडवाल ने बताया कि उनकी दो बेटियां है बड़ी बेटी दीप्ति इंजीनियर है और छोटी बेटी प्रीति आज चिकित्साधिकारी के पद पर नियुक्त हुई है। बताया कि 1996 में जब उन्हें पति के बलिदानी होने की सूचना मिली तो उस समय उनकी बड़ी बेटी दो वर्ष और छोटी बेटी मात्र पांच माह की थी। खबर सुनते ही वह भीतर से पूरी तरह टूट चुकी थी। वह बचपन से ही प्रीति को उसके पिता के सपने के बारे में बताती थी। प्रीति ने भी पिता के सपने को साकार करने के लिए पूरी मेहनत की। प्रीति ने बताया कि कोटद्वार से दसवीं व 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने आर्मी कालेज आफ मेडिकल साइंसेज नई दिल्ली से एमबीबीएस की पढ़ाई की। इसके उपरांत उन्होंने वर्धमान महावीर मेडिकल कालेज और सफदरजंग अस्पताल से एमडी की पढ़ाई की। वर्तमान में वह जनकपुरी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल नई दिल्ली में सीनियर रेजिडेंट पैथोलाजिस्ट के तौर पर कार्य कर रही थी। बताया कि उन्होंने सदैव अपने पिता के सपने को अपना लक्ष्य बनाया हुआ था।