जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : पिछले कई दशकों से शहर के बीच से गुजरने वाला पनियाली गदेरा केवल नोटिसों में ही उलझा हुआ है। अतिक्रमण के कारण पनियाली गदेरा सिमटता जा रहा है। ऐसे में एक बार फिर बरसात के मौसम में गदेरे ने लोगों र्की ंचता बढ़ा दी है। हर मानसून से पहले सरकारी विभाग अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी कर औपचारिकता पूरी कर लेते हैं, जबकि अतिक्रमण जस के तस बने हुए हैं।
सिंचाई विभाग ने इस वर्ष भी पनियाली गदेरे के किनारे रहने वाले 166 परिवारों को नोटिस जारी किए हैं, जिन्हें विभाग ने बाढ़ और कटाव के लिहाज से खतरे की जद में चिह्नित किया है। हालांकि नोटिस जारी होने के कई माह बाद भी अतिक्रमण हटाने की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई शुरू नहीं हो सकी है। दरअसल लैंसडौन वन प्रभाग की कोटद्वार रेंज के जंगलों से निकलने वाला पनियाली गदेरा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के समीप नगर निगम क्षेत्र में प्रवेश करता है। इसके बाद यह शिवपुर, आमपड़ाव, मानपुर, सिताबपुर, काशीरामपुर और कौड़िया होते हुए सुखरो नदी में मिलता है। शहर में प्रवेश करते ही गदेरे का प्राकृतिक स्वरूप लगातार अतिक्रमण के कारण सिकुड़ता जाता है। नतीजतन, बरसात के दौरान तेज बहाव का पानी और मलबा पर्याप्त निकासी न मिलने से आबादी वाले क्षेत्रों में घुस जाता है, जिससे हर वर्ष लोगों को नुकसान उठाना पड़ता है।
वर्षों से नोटिस, कार्रवाई नहीं
पनियाली गदेरे को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई अब तक कागजी कवायद तक सीमित रही है। वर्ष 2017 की प्राकृतिक आपदा के बाद सिंचाई विभाग ने आमपड़ाव से कौड़िया तक 130 अतिक्रमण चिह्नित किए थे, लेकिन एक भी अतिक्रमण नहीं हटाया गया। इसके बाद वर्ष 2023 में विभाग ने दोबारा सर्वे कर 156 अतिक्रमण चिह्नित किए और नोटिस जारी किए, लेकिन तब भी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी। वर्तमान में गदेरे पर 166 से अधिक अतिक्रमण मौजूद हैं। बीते मई में विभाग ने अतिक्रमणकारियों को 15 दिन के भीतर स्वयं अतिक्रमण हटाने का नोटिस दिया था और चेतावनी दी थी कि ऐसा न करने पर विभाग कार्रवाई करेगा। इसके बावजूद करीब दो माह बाद भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है।