नई टिहरी। टिहरी जिले के जंगलों में आग लगने की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही है। जिले में इस वर्ष अब तक जंगलों में आग लगने की 51 घटनाएं हो चुकी है जिनमें करीब 40 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। गर्मी की बढ़ती तपिश और वातावरण में चारों तरफ धुंध छाए रहने से आंखों में जलन की समस्या हो रही है।
टिहरी जिले के सभी क्षेत्रों में पिछले पांच-छह दिनों से जंगलों से उठता धुआं दूर-दूर तक दिखाई दे रहा है। दोपहर के समय वातावरण में धुंध जैसी स्थिति बनी हुई है जिससे लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत महसूस हो रही है। ऐसी स्थिति में लोग सुबह और शाम के समय घरों के बाहर निकलने से परहेज बरत रहे हैं। आग की घटनाएं लगातार बढ़ने से तापमान सामान्य से अधिक महसूस किया जा रहा है। लोगों को दिन के समय तेज गर्मी का सामना करना पड़ रहा है।
चिपको आंदोलन से जुड़े कुंवर सिंह सजवाण का कहना है कि जंगलों की आग सिर्फ पेड़ों का नुकसान नहीं है। यह पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर हमला है। आग के कारण मिट्टी की नमी कम होती है, छोटे पौधे और जड़ी-बूटियां नष्ट होती हैं। वन्यजीव अपने प्राकृतिक आवास छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। लगातार बढ़ती आग की घटनाएं आने वाले समय में जल स्रोतों और पर्यावरणीय संतुलन के लिए गंभीर चुनौती बन सकती हैं। जिला अस्पताल बौराड़ी के फिजिशियन डॉ. अमित राय का कहना है कि जंगलों की आग से निकलने वाला धुआं स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। वातावरण में धूल और धुएं के महीन कण आंखों में जलन, एलर्जी, सांस फूलने, खांसी और अस्थमा के मरीजों की परेशानी बढ़ा सकते हैं। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस संबंधी रोगों से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। घर से बाहर जाने के दौरान मास्क पहनकर रखे। पीजी कॉलेज नई टिहरी जंतु विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. वीपी सेमवाल का कहना है कि जंगलों की आग का असर वन्यजीवों पर भी पड़ रहा है। छोटे जीव-जंतु, पक्षियों के घोंसले और कई दुर्लभ प्रजातियां आग की चपेट में आ रही हैं। भोजन और सुरक्षित स्थान की तलाश में जंगली जानवर आबादी वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ रहे हैं जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका और अधिक बढ़ गई है।
–वनाग्नि को रोकने के लिए 183 फायर क्रू स्टेशनों की स्थापना की गई है। 654 फायर वाचरों की तैनाती की गई है। वनग्नि को रोकने के लिए पहले ही ग्राम पंचायतों और स्कूलों में गोष्ठियां आयोजित कर लोगों से सहयोग की अपील की गई। जंगलों की आग बुझाने में कई गांवों में लोगों का भरपूर सहयोग भी मिल रहा है। -पुनीत तोमर, डीएफओ टिहरी वन प्रभाग टिहरी