घटनास्थल पर पहुंचने एवं रेस्क्यू कार्रवाई का किया अभ्यास
जयन्त प्रतिनिधि।
रूद्रप्रयाग : जनपद में आपदा की संभावित परिस्थितियों के दौरान त्वरित एवं प्रभावी राहत-बचाव कार्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बुधवार को जिला प्रशासन के निर्देशन में आर्मी (8 सिख लाइट इन्फेंट्री रेजिमेंट), डीडीआरएफ, एसडीआरएफ एवं पुलिस बल द्वारा संयुक्त रूप से मॉक अभ्यास आयोजित किया गया। मॉक अभ्यास के माध्यम से जिला प्रशासन द्वारा आपदा के दौरान त्वरित सूचना, बेहतर समन्वय, तत्काल रिस्पांस एवं प्रभावी राहत-बचाव की कार्य प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने का प्रयास किया गया।

मॉक अभ्यास के तहत प्रात: 11: 50 बजे जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र को सूचना प्राप्त हुई कि लाटा बाबा के समीप पहाड़ी से मलवा एवं बोल्डर आने के कारण क्षति होने की संभावना है। सूचना प्राप्त होते ही जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए आर्मी (8 सिख लाइट इन्फेंट्री रेजिमेंट), डीडीआरएफ टीम, एसडीआरएफ, पुलिस बल एवं 108 एंबुलेंस को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। घटनास्थल पर पहुंचकर संबंधित टीमों द्वारा संभावित प्रभावित क्षेत्र का जायजा लेने, सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने, प्रभावित व्यक्तियों को सुरक्षित निकालने, प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने तथा आवश्यकता पड़ने पर घायलों को अस्पताल पहुंचाने की कार्रवाई का अभ्यास किया गया। साथ ही घटना स्थल पर विभिन्न रेस्क्यू एवं सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय, सूचना के आदान-प्रदान और उपलब्ध उपकरणों के प्रभावी उपयोग का भी परीक्षण किया गया। मॉक अभ्यास के दौरान यह भी परखा गया कि आपदा की सूचना प्राप्त होने के बाद संबंधित टीमें कितनी तत्परता से घटना स्थल तक पहुंचती हैं तथा उपलब्ध मानव संसाधन, रेस्क्यू उपकरण, एंबुलेंस एवं अन्य आवश्यक संसाधनों को कितनी प्रभावी ढंग से उपयोग में लाया जाता है। इस दौरान आपातकालीन परिस्थितियों में संभावित चुनौतियों के बीच राहत एवं बचाव कार्यों को व्यवस्थित रूप से संचालित करने का अभ्यास किया गया। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने कहा कि मॉक अभ्यास का मुख्य उद्देश्य वास्तविक आपदा के समय सभी संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए त्वरित एवं प्रभावी राहत-बचाव कार्रवाई सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि मॉक अभ्यास से रेस्क्यू टीमों की प्रतिक्रिया क्षमता, उपलब्ध संसाधनों एवं उपकरणों की तत्परता तथा आपदा के दौरान सूचना के त्वरित आदान-प्रदान की व्यवस्था को परखा जाता है।