उत्तराखंड की शान और भारत के महान निशानेबाज जसपाल राणा का निधन, खेल जगत में शोक

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देहरादून। भारतीय निशानेबाजी जगत को शुक्रवार को उस समय बड़ा झटका लगा, जब देश के सबसे सफल निशानेबाजों में से एक और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कोच जसपाल राणा का 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से पूरे देश और विशेष रूप से उत्तराखंड में शोक की लहर दौड़ गई है। वह हाल ही में जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ विश्व कप से लौटे थे, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। उपचार के दौरान नई दिल्ली के एक अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली।
टिहरी गढ़वाल के चिलामू गांव में जन्मे जसपाल राणा भारतीय निशानेबाजी के स्वर्णिम अध्यायों में शामिल रहे। उन्होंने एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत को कई पदक दिलाए और देश का गौरव बढ़ाया। राष्ट्रमंडल खेलों में उनके नाम 15 पदक दर्ज हैं, जो उन्हें भारत के सबसे सफल खिलाड़ियों में शामिल करते हैं।
एक खिलाड़ी के रूप में सफलता हासिल करने के बाद उन्होंने कोच की भूमिका में भी भारतीय निशानेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर समेत कई युवा खिलाड़ियों को उन्होंने तराशा और अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जसपाल राणा का जाना भारतीय खेल जगत के लिए एक बड़ी क्षति है। वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उन्हें उत्कृष्ट खिलाड़ी, सफल कोच और नेकदिल इंसान बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
उत्तराखंड के लिए जसपाल राणा केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि प्रेरणा के प्रतीक थे। देहरादून स्थित उनकी शूटिंग अकादमी से कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार हुए। उनका जीवन अनुशासन, समर्पण और उत्कृष्टता का उदाहरण था।
जसपाल राणा का निधन भारतीय खेल जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। आने वाली पीढ़ियां उन्हें एक महान खिलाड़ी, कुशल प्रशिक्षक और भारतीय निशानेबाजी के सच्चे नायक के रूप में हमेशा याद रखेंगी

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