देहरादून: नगर निकायों में क्लर्क, सफाई निरीक्षक, कर अधीक्षक, अकाउंट कर्मचारियों को प्रभारी अधिशासी अधिकारी (ईओ) किस आधार पर बनाया, इसका जवाब देने से शहरी विकास निदेशक कतरा रहे हैं। सवाल उठ रहे हैं कि 18 प्रभारी ईओ के चयन का पैमाना क्या है। शहरी विकास विभाग ने हाल ही में नौ स्थायी ईओ को नगर निगमों में प्रभारी सहायक नगर आयुक्त बनाते हुए कुल 18 क्लर्क, सफाई निरीक्षक, कर अधीक्षक, अकाउंट कर्मचारियों को नगर पालिका और नगर पंचायतों में प्रभारी ईओ बना दिया था। शहरी विकास मंत्री राम सिंह कैड़ा ने बताया था कि यह व्यवस्था पूर्व से चली आ रही है। लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं कि इन प्रभारी ईओ के चयन का पैमाना क्या है।
वरिष्ठ होते हुए भी अपने मूल कार्यों में ही लगे कई
अगर चयन का पैमाना वरिष्ठता है तो इनमे से तमाम ऐसे कर्मचारी हैं, जो वरिष्ठता सूची में बेहद निचले पायदान पर हैं। एक तो वरिष्ठता सूची में 177 वें स्थान पर है। एक प्रभारी ईओ अपने संवर्ग में 56वें स्थान पर हैं। तमाम सफाई निरीक्षक, कर अधीक्षक ऐसे हैं जो वरिष्ठ होते हुए भी अपने मूल कार्यों में ही लगे हुए हैं। सवाल उठ रहे हैं कि शहरी विकास विभाग ने पिक एंड चूज की नीति अपनाते हुए मनमर्जी से अपने लोगों को प्रभारी ईओ बनाया है। सवाल पूछने के लिए अपर सचिव एवं निदेशक शहरी विकास विनोद गिरी गोस्वामी को फोन, मैसेज, वॉट्सएप मैसेज किया गया लेकिन उनका कोई जवाब नहीं मिला। जब आएगा तो प्रकाशित किया जाएगा।