जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : शिक्षक दिवस पर राजकीय इंटर कॉलेज कोटद्वार में आयोजित कार्यक्रम में महान शिक्षाविद्, दार्शनिक एवं भारत के द्वितीय राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के योगदान को याद किया गया। इस दौरान शिक्षकों एवं उपस्थित लोगों ने उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम में शिक्षाविद् एवं पूर्व मुख्य शिक्षा अधिकारी देहरादून प्रदीप रावत ने कहा कि डॉ. राधाकृष्णन असाधारण प्रतिभा संपन्न महापुरुष थे। स्वामी विवेकानंद के बाद उन्होंने ही पाश्चात्य जगत को भारतीय दर्शन से व्यापक रूप से परिचित कराया। इस दृष्टि से उनकी पुस्तकें ‘इंडियन फिलॉसफी’ और ‘द हिंदू व्यू ऑफ लाइफ’ अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक होना मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। सभी शिक्षकों को मिशनरी भाव से ज्ञान का उजियारा चारों ओर फैलाने के अपने पुनीत कर्तव्य का निर्वहन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा और शिक्षकों के सामने अनेक चुनौतियां हैं। इन चुनौतियों का प्रतिबद्धता के साथ सामना करते हुए ऐसे समाज के निर्माण की दिशा में कार्य करना होगा, जहां शिक्षा संस्कार और जिम्मेदारी का माध्यम बनें। प्रधानाचार्य मुकेश रावत ने कहा कि डॉ. राधाकृष्णन को जो भी दायित्व सौंपे गए, उन्होंने पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ उनका निर्वहन किया तथा समाज और राष्ट्र जीवन में आदर्श स्थापित किया। उनके जन्मदिवस पांच सितंबर को देशभर में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर राजकीय शिक्षक संघ के मंडलीय मंत्री मनमोहन सिंह चौहान, मनमोहन सिंह रौतेला एवं डॉ. पदमेश बुडाकोटी ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. पदमेश बुडाकोटी ने किया। कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों के शिक्षक भी मौजूद रहे।